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मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

पृष्ठ 38, कुल 395 में से

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पृष्ठ 38

१४ मयमतम्
पूर्वभागजलोपेता तथाश्वत्थद्रुमान्विता।
विपुला लोहयुग्भूमिः क्षत्रियाणां हितप्रदा।।१०।।
वैश्यवर्णा भूमि—
नातिकृष्णा न रक्ता च प्लक्षद्रुमसमन्विता।
दक्षिणायां जलोपेता नातिनिम्नोन्नतस्थला।।११।।
भूरियं वैश्यजातीनां बलसम्पत्करा मता।
शूद्रा भूमि—
कटुमृत्स्ना कृष्णवर्णा वटवृक्षसमन्विता।।१२।।
वारुण्यामुदकोपेता शूद्राणां क्षेमकारिणी।
इनके अतिरिक्त भूमि के उत्तम गुणों का वर्णन ( १४-२१ ) प्राप्त होता है एवं
इसी के साथ भूमि के दोष ( २३-२७ ) भी वर्णित हैं, जिनमें भूकम्प से प्रभावित एवं
अग्नि से दग्ध भूमि का परित्याग विशेष रूप से उल्लेखनीय है—
कम्पेन भेदिता भूमिरग्निदग्धा च सर्वतः। ( ५-२७ )
अप्रशस्त भूमि की चर्चा समराङ्गणसूत्रधार ( ८.५२-६२ ) में विस्तार से प्राप्त
होती है। अन्य वास्तुग्रन्थों में भी इस विषय पर प्रकाश डाला गया है।