मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
पृष्ठ 162, कुल 395 में से
संदर्भ में पढ़ेंअथ पञ्चदशोऽध्यायः
( पादप्रमाणद्रव्यपरिग्रहविधानम् )
☀ स्तम्बलक्षणम् ☀
पादायामं सविस्तारमाकारं भूषणादिकम् ।
लक्षणान्तरतः सम्यग् वक्ष्ये संक्षेपतः क्रमात् ॥१॥
स्तम्भ के लक्षण—मैं ( मय ऋषि ) अन्य लक्षणों के साथ स्तम्भों की लम्बाई,
चौड़ाई, आकृति एवं उनके अलङ्करण आदि का संक्षेप में सम्यक् रूप से क्रमशः वर्णन
कर रहा हूँ॥१॥
स्थाणुः स्थूणश्च पादश्च जङ्घा च चरणोऽङ्घ्रिकः ।
स्तम्भश्च तलिपः कम्पः पर्यायवचनानि हि ॥२॥
स्थाणु, स्थूण, पाद, जङ्घा, चरण, अङ्घ्रिक, स्तम्भ, तलिप एवं कम्प ( स्तम्भ
के ) पर्यायवाची शब्द हैं॥२॥
☀ स्तम्भमानम् ☀
सवितस्त्यष्टहस्तोच्चं द्वादशक्ष्माद्यपादकम् ।
तत्तद्वितस्तिहीनेन त्रिकरं चान्त्यभूमिके ॥३॥
स्तम्भ का प्रमाण—बारह तल के भवन में भूतल पर बनने वाले स्तम्भ की
ऊँचाई आठ हाथ एक बित्ता ( साढ़े आठ हाथ ) होनी चाहिये। प्रत्येक तल पर एक-
एक बित्ता कम करते हुये सबसे ऊपर के तल पर तीन हाथ ऊँचाई होनी चाहिये॥३॥
आत्तोत्सेधांशमानेन पादोच्चं वा विधीयते ।
आत्ताधिष्ठानतुङ्गस्य द्विगुणं पादतुङ्गकम् ॥४॥
अथवा स्तम्भ की ऊँचाई का मापन दिये गये माप से ( दूसरे ढंग से ) करना
चाहिये। अधिष्ठान की ऊँचाई का दुगुना माप स्तम्भ का रखना चाहिये॥४॥
द्विगुणादधिकोत्सेधः स्तम्भः प्रोक्तः स्वयम्भुवा ।
अष्टविंशतिमात्रैस्तु मूलभूस्तम्भवस्तृतम् ॥५॥
( बारह तल के भवन में ) स्वयम्भू के अनुसार स्तम्भ की ऊँचाई अधिष्ठान