मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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मार्क्स-दर्शन ५४३
आस्ट्रेलियाके खरगोशके जोड़ेसे बहुत-से खरगोशोंका उत्पन्न हो जाना
भी कौन-सी नयी बात है ? अनुकूल परिस्थिति मिलनेसे कुत्ते, शूकर, मुर्गे आदि
किसी भी जोड़ेसे सामूहिक विस्तार होता है । कणिकसे सामूहिक परिवर्तनका
उदाहरण भी इसी ढंगका है । 'एक धूपका दिन साधारण है, परंतु वही परिमाण-
की वृद्धिसे होकर बहुत सा धूपका दिन सूखा बन जाता है,' यह भी कोई चमत्कृति
नहीं है । दीपक आदिरूपमें छोटी अग्नि वायुसे बुझ जाती है, बड़ी अग्निका वायु
सहायक बन जाता है । मृदु आतप रोचक होता है, तीव्र हो जानेपर वही उद्वेजक
हो जाता है । अग्निका एक सीमाका सन्निधान अनुकूल होता है, अन्य प्रकारका
सन्निधान मारक हो जाता है । सामूहिकसे कणिकका उदाहरण, समूह टूटकर अलग-
अलग हो जाना, परिवार टूटकर पृथक्-पृथक् हो जाना आदि भी किसी सिद्धान्तका
साधक नहीं है । विभाजनसे समूहका विशरण होना प्रसिद्ध है ।
इसी प्रकार लेवीका जगलकी काईसे जगलके उजड