मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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हैं। यदि सुख-शान्ति हो तो २५ वर्षमें मनुष्य-संख्या भी दूनी हो जाती है।
एक जोडे हाथीसे ८०० सौ वर्षोंमें २ करोड़के करीब संतति होती है, 'जीवन-संग्राम'
का तात्पर्य यह है कि सृष्टिमें हर जगह संग्राम हो रहे हैं । चींटियोंमे ही युद्धके
कारण करोड़ोंकी मृत्यु होती है । कई मछलियों एक ऋतुमें १॥ करोड़तक
अण्डे देती हैं, परंतु उनके सिरपर बैठे हुए शत्रु उन्हे नष्ट कर देते हैं । एक
ऋतुतक रहनेवाले पौधोंसे २० वर्षकी अवधिमें १० लाख पौधे पैदा होते हैं,
पर उनके सब बीज अच्छी भूमिमें नहीं पड़ते, इससे संततिका नाश हो जाता
है। वर्षा, तूफान, भूकम्प, सिंह, व्याघ्र, सर्प आदिसे और स्वजातियोंसे
सर्वदा असंख्य प्राणियोंका नाश हुआ करता है । इसी तरह नाना प्रकारकी
बीमारियाँ भी करोड़ों प्राणियोंका नाश किया करती हैं, यही जीवन-संग्राम है। इन
संग्रामोंमे वही बचते हैं, जो दूसरोंसे योग्य होते हैं और वे ही मरते हैं, जो निर्बल
एवं अयोग्य होते हैं। प्राकृतिक चुनावकी प्रवृत्ति रक्षाकी अपेक्षा नाश करनेकी
ओर अधिक है। एक ही जातिके भिन्न-भिन्न प्रकारके लाखो व्यक्तियोको उत्पन्न
करनेमे प्रकृतिका यही हेतु प्रतीत होता है कि यदि इनमेंसे दो, चार या दस-पाँच
भी परिस्थितिके अनुकूल होकर बच जायें तो उनसे उस जातिका अस्तित्व बना
रहेगा। यही योग्यताओंका संततिमें संक्रमण होनेका ढंग है । यही डार्विनकी
विकास-विधि है।
तीसरी विधि लामार्ककी है। उसके अनुसार 'कार्यसे प्राप्त हुआ परिवर्तन
संततिमें आता है। जिराफ नामके पशुने पत्तोंके लिये गर्दन उठायी, उसकी
संततिने भी प्रयत्न किया। परिणाम यह हुआ कि गर्दन आगे बढ़ गयी। अगली
संततिने और प्रयत्न किया, गर्दन और अधिक बढ़ायी। इस तरह प्रयत्न करनेसे
उसकी गर्दन बहुत अधिक बढ़ गयी।'
'विकासकी एक और विधि कृत्रिम और प्राकृतिक चुनावकी भी है।
पशुओंके पालनेवाले कृत्रिम चुनावसे ही अच्छे बैल और घोड़े उत्पन्न करते हैं।
किसान अच्छे बीजसे ही अच्छी फसल पैदा करते हैं । इस कृत्रिम चुनावसे ही
कबूतर अनेक प्रकारके बनाये जाते हैं। जापानके मुर्गोंकी पूँछ बीस-बीस फुटतक
लंबी कर दी गयी है। यह कृत्रिम चुनावकी विधि है। आस्ट्रेलियाके शशकोंमें
पहले वृक्षपर चलने लायक नाखून नहीं थे, पर अब वैसे ही नाखून निकल रहे
हैं, यह प्राकृतिक चुनावका नमूना है। विकासमें कार्य-कारण-भाव देखा जाता है।
इंग्लैण्डकी गाये विधवा स्त्रियोंके अधीन जीती हैं । वहाँ एक 'क्लवर' नामकी
वनस्पति होती है, जिसकी वृद्धि मक्खियोंपर निर्भर है। जब चूहे मक्खियोंके अंडे
खा जाते हैं, तब घासकी वृद्धि मारी जाती है। इंग्लैण्डकी विधवा स्त्रियाँ बिल्ली
पालती हैं। बिल्लियाँ चूहोंको खा जाती हैं, तब मक्खियोंकी खूब वृद्धि होती है।