मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 68, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ें६६ मनुस्मृति ।
वागप के कर्ता ) चौथा नर-नारायण ( धर्मपत्नी से उत्पन्न
होकर दुश्चर तप करनेवाले ) पांचवां कपिल ( कालवशसुप्त-
सांख्य को आसुरिनाम ब्राह्मण को बतलानेवाले ) छठां
दत्तात्रेय ( अत्रि से अनसूया में जन्म लेकर प्रह्लाद आदि को
अध्यात्म-विद्या पढ़ानेवाले ) सातवां यज्ञ ( रुचि से आकूति में
पैदा होकर अपने यामादिक पुत्रों के साथ स्वायंभुव मन्वन्तर
के पालक ) आठवां ऋषभ ( नाभि से मेरुदेवी में उत्पन्न-
अत्याश्रमी ) नवां पृथु ( पृथ्वी को दुहनेवाले ) दशवां मत्स्य
( मनु के रक्षक ) ग्यारहवां कूर्म ( समुद्र-मथन के समय मन्दराद्रि
को अपने पीठ पर धारण करनेवाले ) बारहवां धन्वन्तरि
( आयुर्वेदके प्रकाशक ) तेरहवां मोहिनी ( स्त्रीरूप से असुरों
को मोहित करके सुरों को अमृत पिलानेवाले ) चौदहवां नृसिंह
( हिरण्यकशिपु के नाशकर्ता ) पन्द्रहवां वामन ( बलिको बांध-
नेवाले ) सोलहवां परशुराम ( इक्कीस बार क्षत्रियों का संहार
करनेवाले ) सत्रहवां व्यास ( पराशर से सत्यवती में जन्म
लेकर वेदों के विभाग करनेवाले ) अठारहवां राम ( दशरथ
के पुत्र बन कर रावण के विध्वंसक ) उन्नीसवां राम-कृष्ण
( यदुकुल में प्रकट होकर भूभार के हर्ता ) बीसवां बुद्ध ( अजन
के पुत्र देवद्वेषियों के मोहक ) इक्कीसवां कल्कि का अवतार
( विष्णुयशा के पुत्र चौरप्राय राजाओं के विनाशक ) ।
१-३ कहीं राम, तथा कृष्ण की अलग २ अवतार संख्या दी है; नर और
नारायण की एकही संख्या दी है; बुद्ध के पितृनाम में 'जिन' यह पाठान्तर
श्रीधरी टीका से प्राप्त होता है ।
४ ' अवतारा ह्यसंख्येया हरेः सत्त्वनिधेर्द्विजाः ' इससे अवतारों की असंख्ये-
यता, तथा ' एतद्रूपं भगवतो ह्यरूपस्य चिदात्मनः । मायागुणैर्विरचितं महदादिभि-
रात्मनि ॥ ' इससे रूपाभ्यास, तथा ' यथा नभसि मेघौघो रेणुर्वा पार्थिवोऽनिले ।
एवं द्रष्टरि दृश्यत्वमारोपितमबुद्धिभिः ॥ ' यह दृष्टान्त दिया है । देखो श्रीधरी ।