मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 481, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ेंनवाँ अध्याय । ३४१
पौत्रदौहित्रयोर्लोके न विशेषोऽस्ति धर्मतः ।
तयोर्हि माता पितरौ संभूतौ तस्य देहतः ॥ १३३ ॥
जैसी आत्मा है वैसा ही पुत्र है । पुत्र और पुत्री समान हैं । इस
लिए पिता की आत्मारूप-पुत्री बैठी हो तो दूसरा धन कैसे ले-
जाय ? जो धन माता को दहेज में मिला हो वह कन्या का ही
भाग है। और पुत्रहीन का सब धन दौहित्र का ही है । जिसको
पुत्रिका किया हो उसका पुत्र, अपुत्र-पिता का धन ले और वह
पिता और नाना को पिण्डदान करे । लोक में धर्मानुसार पौत्र
और दौहित्र में कुछ भेद नहीं है । क्योंकि दोनों के माता-पिता
एकही देह से उत्पन्न हुए हैं ॥ १३०-१३३ ॥
पुत्रिकायां कृतायां तु यदि पुत्रोऽनुजायते ।
समस्तत्र विभागःस्याज्ज्येष्ठतानास्ति हि स्त्रियाः॥१३४॥
अपुत्रायां मृतायां तु पुत्रिकायां कथंचन ।
धनं तत्पुत्रिकाभर्ता हरेतैवाविचारयन् ॥ १३५ ॥
अकृता वा कृता वापि यं विन्देत्सदृशात्सुतम् ।
पौत्रीमातामहस्तेन दद्यात्पिण्डं हरेद्धनम् ॥ १३६ ॥
पुत्रेण लोकाञ्जयति पौत्रेणानन्त्यमश्नुते ।
अथ पुत्रस्य पौत्रेण ब्रध्नस्याप्नोति विष्टपम् ॥१३७॥
पुन्नाम्नो नरकाद्यस्मात् त्रायते पितरं सुतः ।
तस्मात्पुत्र इति प्रोक्तः स्वयमेव स्वयम्भुवा ॥ १३८ ॥
यदि पुत्रिका करने के बाद अपने पुत्र होजाय तो पुत्र और दौहित्र
का समान भाग करे । उसमें कन्या की श्रेष्ठता नहीं मानी जाती ।
पुत्रिका होनेवाली कन्या मरजाय तो उसका पति सब धन ले-
जाय । पुत्रिका विधान किया हो वा न किया हो, समान जाति
वाले जामाता से जिस पुत्र को पावे-उसीसे नाना पौत्रवान्