मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 40, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ें३८ मनुस्मृति ।
‘ उत्पद्यतां नाम विलीयतां
वा नवा नवा जातिरहो तया किम् ।
न यत्र पारस्परिकी प्रतीतिः
क्रियापि सा जातिरनर्गला किम् ॥
जातिस्तदुत्कर्षविधिर्द्वयीति
स्मार्ती न लौकिक्यथ शासनेन ।
तत्राश्रयो युज्यत आत्मवृद्ध्यै
नहीच्छया सिध्यति भागधेयम् ॥’
अब ‘उपनयन’ के पूर्वपश्चाद्भावी संस्कारों का क्रम
दिखलाया जाता है, यह क्रम यद्यपि स्मृतिपाठभेद के कारण
कई स्थलों में भिन्न भिन्न प्राप्त होता है तो भी प्रौढ़ विद्वानों के
लेखानुसार ठीक कर लिया गया है। “ १ गर्भाधान, २ पुंस-
वन, ३ सीमन्तोन्नयन, ४ जातकर्म, ५ नामकरण, ६ अन्न-
प्राशन, ७ चौल, ८ उपनयन, १२ चतुर्वेदव्रत, १३ स्नान
(समावर्तन) १४ सहधर्मचारिणी-संयोग (विवाह) १६ पञ्च-
महायज्ञ, २० अष्टका, २१ पार्वण, २२ श्राद्ध, २३ श्रावणी,
२४ आग्रहायणी, २५ चैत्री, २६ आश्वयुजी, २७ अग्न्याधान,
२८ अग्निहोत्र, २९ दर्शपौर्णमास, ३० चातुर्मास्य, ३१ आग्र-
यणेष्टि, ३२ निरूढपशुबन्ध, ३३ सौत्रामणी, ३४ अग्निष्टोम,
३५ अत्यग्निष्टोम, ३६ उक्थ, ३७ षोडशी, ३८ वाजपेय,
३६ अतिरात्र, ४० आप्तोर्याम ये चालीस संस्कारों के नाम हैं।
इनके अनुष्ठान-क्रम और लक्षण कल्पसूत्रों से जाने जाते हैं।
इनमें गर्भाधान से लेकर विवाहपर्यन्त चौदह संस्कारों से
पवित्र गृहस्थ=गृही=घरवाला बनता है और अगले संस्कारों
से वह उत्तरोत्तर माननीय बनता है (और चतुर्वेदव्रत के