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सर्वकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 649 में से

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पृष्ठ 25

[Header] भूमिका । २३

ततो वासिष्ठलैङ्गाख्यं प्रोक्तं माहेश्वरं परम् ।
ततः साम्बपुराणाख्यं ततः सौरं महाद्भुतम् ॥
पाराशरं ततः प्रोक्तं मारीचाख्यं ततः परम् ।
भार्गवाख्यं ततः प्रोक्तं सर्वधर्मार्थसाधकम् ॥'
सूतसंहिता ।
पुराण और उपपुराण।
विष्णुपुराण के गणनानुसार भी यही पुराण हैं केवल
इतना भेद है—छठा नारदीय, सातवां मार्कण्डेय, आठवां
आग्नेय, नववां भविष्य । और देवीभागवत के अनुसार वायु-
पुराण, पुराणों में शिवपुराण, उपपुराणों में है । प्रमाणवाक्य
स्मरण रखने योग्य है—
'मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं वचतुष्टयम् ।
अनापलिङ्कस्कानि पुराणानि पृथक् पृथक् ॥'
भागवत दो प्रकार के हैं । एक विष्णुभागवत, दूसरा
देवीभागवत । इनमें से एक पुराण, दूसरा उपपुराण है;
क्योंकि दोनों के पुराण होने में कोई प्रमाण वाक्य नहीं प्राप्त
होता । इस दशा में कौन पुराण है ? कौन उपपुराण है ?
इस निर्णय के लिये महाभारत का आश्रय लेकर दोनों
भागवतों का पूर्वापर देख उनके प्रारम्भिक श्लोकों को देखो
और एक को पुराण दूसरे को उपपुराण मान लो ।
सिद्धान्त से जब ब्रह्म के विष्णु-शिव आदि नाम हैं तब
पुराण अथवा उपपुराण में कहीं किसी देव के प्रतिपादन से
उसका उत्कर्ष वा अपकर्ष नहीं है । और यहां— हीं है
'ब्रह्मविष्णुशिवा ब्रह्मन् प्रधानाब्रह्मशक्तयः । वचनानुसार
ततो न्यूनाश्च मैत्रेय देवा दक्षादयस्ततः' १ मनु, २ अङ्गिरा,