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सर्वकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

पृष्ठ 141, कुल 649 में से

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पृष्ठ 141

श्रीगणेशाय नमः ।
मनुस्मृति ।
पहला अध्याय ।
मनुमेकाग्रमासीनमभिगम्य महर्षयः ।
प्रतिपूज्य यथान्यायमिदं वचनमब्रुवन् ॥ १ ॥
भगवन् सर्ववर्णानां यथावदनुपूर्वशः ।
अन्तरप्रभवानाञ्च धर्मान्नो वक्तुमर्हसि ॥ २ ॥
त्वमेको ह्यस्य सर्वस्य विधानस्य स्वयंभुवः ।
अचिन्त्यस्याप्रमेयस्य कार्यतत्त्वार्थवित्प्रभो ॥ ३ ॥
स तैः पृष्टस्तथा सम्यगमितौजा महात्मभिः ।
प्रत्युवाचार्च्य तान्सर्वान्महर्षीञ्छ्रूयतामिति ॥ ४ ॥
ॐ नमः शिवाय ।
पहला अध्याय ।
महर्षियों ने एकाग्रचित्त बैठे हुए मनु महाराज के पास जाकर
और उनका पूजन करके, विधिपूर्वक यह प्रश्न किया—हे भगवन् !
आप सब ब्राह्मण आदि वर्णों के और सङ्कीर्ण जातियों के वर्णाश्रम-
धर्म क्रम से कहने में समर्थ हैं, इस लिये हमलोगों को उपदेश क-
रिए । आप सब वैदिक श्रौत-स्मार्त्त कर्मों के अगाध और अनन्त
विषयों के एकही जानने वाले हैं ॥ १-३ ॥ इस प्रकार महर्षियों
के विनयपूर्वक प्रश्नों को सुनकर, महात्मा मनु ने, सब का आदर
करके कहा-अच्छा सुनो ॥ ४ ॥