मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 127, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ेंभूमिका । १२५
अध्वर्यु आदि किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं है किन्तु
ऋत्विजों की उपाधि (पदवी) है; इसी प्रकार मनु (स्वायं-
भुव-वैवस्वत आदि) भी किसी एक व्यक्ति की संज्ञा नहीं है
किंतु ब्रह्मा के दिन में एकहत्तर महायुगपर्यन्त प्रजापालन
करनेवाले अधिकारी की पदवी है।
प्रमाणवचन-
'न वैतच्छ्रुतिसामान्यमात्रं नित्येऽपि संभवात् ।
यज्ञेऽध्वर्युरिव ह्यस्ति मनुर्मन्वन्तरे सदा ॥
प्रतिमन्वन्तरं चैवं श्रुतिरन्या विधीयते ।
स्थिताश्च मनवो नित्यं कल्पे कल्पे चतुर्दश ॥
तेन तद्वाक्यचेष्टानां सर्वदैवास्ति संभवः ।
तदुक्तिज्ञापनाद् वेदो नानित्योऽतो भविष्यति ॥
प्रतियज्ञं भवन्त्यन्ये षोडश षोडशर्त्विजः ।
आदिमत्त्वं च वेदस्य न तच्चरितबन्धनात् ॥'
इत्यादि ।