सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary

नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा

DevanagariHindipublished145 पृष्ठ

१०४ मन्त्ररामायण
सीता भूमि में चली गयी। माता भूमि को शिर पर धारण करने
वाले शेष नाग रूपी लक्ष्मण अपनी प्रकृति के अनुसार अनन्त में लीन हो
गये। हम लोग पुत्र और पशुओं के साथ रहें। जो भी द्वेष और मृत्यु है
वह नष्ट हो।
इतः प्रागेव सीतालक्ष्मणौ स्वं विग्रहमुपसंजह्रतुरित्याह—भूमिरिति । भूमिं
सीता भूमिम् अगात् प्रविवेश, माता भूमेस्तोलयिता शिरसा धर्त्ता शेषरूपी लक्ष्मणः
मातरं स्वप्रकृतिमनन्तम् अप्यगात् अपि गतः, वयं च पुत्रैः पशुभिश्च सङ्गता
भूयास्म, यो नो द्वेष्टि रजकादिर्निन्दको वा मृत्युर्वा स भिद्यतां नश्यतु ॥ १५६ ॥
नावान क्षोदः प्रदिशः पृथिव्याः स्वस्तिभिरति दुर्गाणि विश्वा ।
स्वांप्रजां बृहदुक्थो महित्वावरेऽदधादापरेषु ॥ १५७ ॥
ऋ. १०. ५६, ७
प्रजा का कल्याण करने वाले, पृथिवी को जीतकर प्रजा को सङ्कट
से पार कराने वाले, महान कर्म करने वाले राम अपनी महिमा से
अपनी प्रजा को उसी प्रकार ब्रह्मलोक में ले जायेंगे। जैसे नौका के
द्वारा महानदी पार की जाती है।
उपाधिपक्षपाती मायावी मायाकृतं सर्वमनुचहारेत्याह—नावानेति । नावान
नौकया यथा क्षोदो महाह्रद आक्रम्यते, एवं स्वस्तिभिः कल्याणैः पुष्षकादिभिः
पृथिव्याः प्रदिशः प्रदेशान् आक्रम्य स्वां प्रजां विश्वा सर्वाणि दुर्गाणि सङ्कटानि
अतिपारयित्वा बृहदुक्थो महाकर्मा रामः महित्वा स्वमाहात्म्येन सन्ततिरूपां
प्रजाम् अवरेषु भूलोकेषु जनरूपां प्रजां परेषु ब्रह्मलोकेषु य अदधात् । एतेन
पौरजनपदानात्मलोकं प्रापयन् महाकारुणिको रामभद्र एव शरणी करणीय इति
दर्शितम् ॥ १५७ ॥
लक्ष्मणार्यधुरतां गिरामिमां लक्ष्मणार्यपुरुषेण दर्शिताम् ॥ साङ्गवेदपदवाक्य-
मानवित्कोपि वीक्ष्य सुमतिः प्रमोदताम् ॥ १ ॥ श्रीरामरक्षाख्यानं मन्त्र-
रामायणाभिधम् ॥ व्याख्यातं राघवस्तेन प्रीयतां करुणानिधिः ॥ २ ॥ दर्शितः
सीतयाऽध्वायं वेदारण्ये निरध्वनि ॥ सन्तो विपुलयन्त्वेनं यास्कभाष्यानुयायिनः
॥ ३ ॥
इति श्रीमत्पदवाक्यप्रमाणमर्यादाधुरन्धरचतुर्धरवंशावतंसगोविन्द-
सूरिसूनोः श्रीनीलकण्ठस्य कृतिः स्वोद्धृतमन्त्ररामायण-
व्याख्या मन्त्ररहस्यप्रकाशिकाख्या समाप्तिमगमत् ॥

इस पृष्ठ पर कोई मुद्रित पाठ (टेक्स्ट) उपलब्ध नहीं है; यह एक रिक्त (blank) पृष्ठ है।

इस पृष्ठ पर कोई पाठ (टेक्स्ट) उपलब्ध नहीं है; यह एक रिक्त पृष्ठ (blank page) है।

इस पृष्ठ पर कोई पाठ (text) अंकित नहीं है; यह एक रिक्त (blank) पृष्ठ है।

हमारे प्रमुख प्रकाशन
तन्त्र मन्त्र सम्बन्धी
१. हिन्दी मन्त्र महार्णव ( मूल एवं हिन्दी अनुवाद )
देवी खण्ड १७५/-, देवता खण्ड १७५/-, मिश्र खण्ड १००/-
२. श्रीविद्यार्णव तन्त्रम् ( मूलमात्र )
पूर्वार्द्धम् १४०/- उत्तरार्धस्य प्रथमो भागः १५०/-
३. कुब्जार्णव तन्त्र ( मूल एवं अंग्रेजी अनुवाद ) ७५.००
४. नारदपञ्चरात्रम् ( मूल एवं हिन्दी अनुवाद ) मूल्य : १००/-
५. धनदारतिप्रिया तन्त्र ( मूल एवं हिन्दी अनुवाद ) मूल्य : ५/-
६. मातृकाभेद तन्त्र ( मूल एवं संस्कृत टिप्पणी सहित ) १५/-
७. त्रिपुरामहिम्न स्तोत्र ( नागेशभट्टकृत एवं गोविन्दाचार्य की संस्कृत टीका ) ८/-
८. बृहत् तन्त्रसार ( मूलमात्र ) मूल्य : २००/-
९. सप्तशतीसर्वस्वम् मूल्य : ६०/-
१०. त्रिपुरातापिन्युपनिषद् एवं त्रिपुरोपनिषद् मूल्य : ३/-
११. हनुमद्वाडवानल स्तोत्र एवं हनुमल्लाङ्गूलास्त्र स्तोत्र मूल्य : १/-
१२. शिवस्वरोदय ( मूल एवं अंग्रेजी अनुवाद सहित ) १६/-
१३. शनिस्तोत्रावलि ३/-
१४. वामकेश्वरीमतम् ( मूल एवं अंग्रेजी अनुवाद सहित ) १५/-
१५. कौलज्ञाननिर्णय ( मूल एवं अंग्रेजी अनुवाद सहित ) ५०/-
१६. डामर तन्त्र ( मूल एवं अंग्रेजी अनुवाद ) २५/-
१७. डामर तन्त्र ( मूल एवं हिन्दी अनुवाद ) १८/-
१८. मन्त्र रामायण ( मूल एवं हिन्दी अनुवाद ) १५/-
कतिपय अन्य प्रकाशन
शृङ्गार तिलक (रुद्रट) सहृदयलीला (रुय्यक) २०.००
( मूल एवं हिन्दी अनुवाद )
बौद्ध तर्कभाषा ( मूल एवं हिन्दी अनुवाद सहित ) १०.००
स्वप्न कमलाकर ( मूल एवं हिन्दी ) ५.००
अद्भुत रामायण (महर्षि वाल्मीकि कृत) सजिल्द १६.०० पेपर बैक १२.००
सामुद्रिकशास्त्रम् ( मूल एवं भावार्थबोधिनी टीका सहित ) २०/-
Indological Reference Series

  1. Encyclopedia of Yoga : Ram Kumar Rai 100.00
  2. Dictionaries of Tantraśāstra ( Tantrābhidhānam) 50.00
  3. Encyclopedia of Indian Erotics : Ram Kumar Rai 80.00
    धन्वन्तरि ग्रन्थमाला
    १. बङ्गसेन संहिता ( मूल हिन्दी अनुवाद एवं परिशिष्ट सहित ) १४०.००
    २ हारीत संहिता ( मूल एवं हिन्दी अनुवाद ) मूल्य : ७५/-