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सर्वकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished120 पृष्ठ

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पृष्ठ 6

...तो मन को क्या पड़ी कि आत्मा को तंग कर रहा है ? जैसे प्रेतात्मा को पिंड़ा चाहिए, ऐसे ही मन को आत्मा चाहिए। नहीं तो कुछ काम नहीं हो पायेगा। वो नहीं चाहता है कि कुछ आत्माएँ निकल जाएँ। वो सावधान है। बेशुमार आत्माएँ हैं। यदि थोड़ी-सी निकल गयीं तो क्या फर्क पड़ता है ? नहीं, फर्क पड़ता है। क्योंकि वो जानता है कि यदि एक भी निकल गया तो कइयों को निकाल ले जायेगा और मेरे लिए खतरा हो जायेगा। इसलिए उलझाता है। यदि आप चिंतन करेंगे तो यह दिखेगा। जैसे शरीर में धड़ दिख रहा है, गर्दन दिख रही है, यह दिखेगा। पर यह चिंतन नहीं करने दे रहा है, किसी भी तरह आत्मा के नजदीक नहीं पहुँचने दे रहा है। इसलिए इस मन से सावधान रहना।

तेरा बैरी कोई नहीं तेरा बैरी मन ॥

मन आपका सबसे बड़ा शत्रु है। आपने घर में पशु रखे होंगे। आजकल वैज्ञानिक युग है; ट्रेक्टर आदि चलते हैं। फिर भी कुछ लोग बैल रखते हैं। बैल को रखने वाले ने उसे जन्म नहीं दिया। फिर क्यों गुलाम बनाकर रखा हुआ है ? न तो उसने बैल को बनाया, न जन्म दिया। फिर क्यों रखा है ? केवल काम करवाने के लिए। यानी अपना काम करवाने के लिए बैल को रखा हुआ है। क्योंकि आप तेज दिमाग के हैं। उसे कैद करके रखा हुआ है। उसे भागने भी नहीं दे रहे हैं। वो भागना भी चाहता होगा। आखिर क्यों नहीं भागने दे रहे हैं आप ? अपने मतलब के लिए।

कुछ ने गाय रखी होती है। बाँधकर रखी होती है। क्योंकि दूध चाहिए। वो बेचारी जाना चाहती होगी, पर वो नहीं जाने देते हैं। रखने वाले ने गाय को जन्म नहीं दिया; बनाया भी नहीं। पर रस्सों से अच्छी तरह से बाँधकर रखा है। वो कभी भाग जाती है तो दूँढ़कर फिर पकड़ लाते हैं और बाँध देते हैं।

बैल को कोई अपने शिकंजे से निकलने नहीं देता है। बैल की कोई पेश नहीं चलती है। वो अपने आप को छुड़ा नहीं पाता होगा। डंडे