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सर्वकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished120 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 120 में से

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पृष्ठ 24

सब कुछ चुपचाप देख रही थी; सहसा उसे कुछ सूझ गया और उसने पेड़ के उस स्थान पर थोड़ी शक्कर लगा दी। अगली बार जब ऋषि बाहर आकर उस पेड़ को चाट रहा था तो वेश्या ने देखा कि ऋषि ने पिछली बार से अधिक बार पेड़ को चाटा है। जब वो चाट कर चला गया तो वेश्या ने तीसरे दिन वहाँ पर शहद लगा दिया और खुद छिपकर देखने लगी। ऋषि ने इस बार पिछली बार से भी ज्यादा चाटा। फिर वेश्या ने उस जगह अनाज लगाना शुरू किया। अब ऋषि रोज खड़ड से बाहर आकर उस पेड़ को चाटने लगा। वेश्या को लगा, अब मामला ठीक है। उसने अब रोटी बनाकर वहाँ रखना शुरू किया। उधर ऋषि ने भी दिन में दो बार बाहर आकर भोजन करना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे ऋषि का शरीर पुष्ट होने लगा; उसमें विषय-विकार उत्पन्न होने लगे। उसे मालूम पड़ गया कि यहाँ पर कोई स्त्री है, जो उसके लिए यह सब कर रही है। बस फिर क्या था! ऋषि की निगाहें चारों ओर उसे खोजने लगीं। वेश्या जान गयी कि उसका काम पूरा हो चुका है। वो खुद उसके सामने आ गयी। ऋषि ने उससे शादी कर ली और कुछ ही समय में वो तीन बच्चों का पिता भी बन गया।

अब ऋषि पूरी तरह से वेश्या के अधीन हो चुका था। वेश्या ने उसे राजा के यहाँ चलने को कहा। कुछ देर हाँ-ना करने के बाद जब ऋषि जाने को राजी हो गया तो वेश्या ने महल में राजा को सूचना भिजवा दी कि नेमि ऋषि आ रहा है। चलते समय वेश्या ने दो बच्चों को ऋषि के दोनों कन्धों पर बिठा दिया, एक को उसकी गोद में दे दिया और स्वयं उसके आगे-आगे बड़े ठाट से चलने लगी।

उधर राज्य में नेमि ऋषि के स्वागत की तैयारियाँ होने लगी। लोग अपने-अपने घरों की छतों पर ऋषि के दर्शन पाने के लिए खड़े हो गये। कुछ समय बाद ऋषि ने राज्य में प्रवेश किया। लोगों ने देखा कि एक जटाधारी दो बच्चों को अपने कन्धों पर बिठाए हुए तथा एक को गोद में उठाए हुए अपनी स्त्री सहित चला आ रहा है। किसी ने बताया