मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
DevanagariHindipublished856 पृष्ठ
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मा ख्या तं व प्र ा य त स म न्वि त म् ॥ ३३ ॥`
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अन्यभूपालभूम्यन्ते युद्धारम्भक्रियान्वितम् ।
Line 16:
सेनानामयुतानां च पृतनाभिः समन्वितम् ॥ ३४ ॥
Right side: 68
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तदेतच्छिविरं प्रोक्तं तन्त्रविद्भिः पुरातनैः ।
Line 18:
नानाजनैश्च संपूर्णा भूपहर्म्यैश्च संयुतम् ॥ ३५ ॥
Wait: नानाजनैश्च संपूर्णा or संपूर्ण भूपहर्म्यैश्च संयुतम्?
Look at संपूर्णा: सं पू र्णा (with ा)!
Then भूपहर्म्यैश्च संयुतम् ॥ ३५ ॥
Line 19:
बहुरक्षसमोपेतमेतत्सेनामुखं भवेत् ।
Wait, is it बहुरक्ष or बहुरथ or बहुरच?
Look at line 19: ब हु र क्ष स मो पे त मे त `