सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 847, कुल 856 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 847

CHAPTER LXVII

  1. B. ऋजु, I. रज्जु; the idea of the recumbent posture is apparent-
    ly intended here for which the usual term is शयन।
  2. I. देवलम्बा, B. C. देहलम्ब्या।
  3. C. लक्षणं, I. प्रक्षणं।
  4. C. समबरायतं वापि चाध्य।
  5. I. मुनि, B. C. मान।
  6. Between this and the next line I. repeats the first pāda of line
  7. (1) C. मुखाताैर, B. मुखांतादि।
    (2) B. द्विसूत्रं for द्विद्विमात्रं।
  8. (1) C. तत् ब्रह्मश्व(स्य)पार्श्वे, B. तत् प्रकृष्टचिरं पार्श्वे।
    (2) B. रुजु, C. ऋजु।
  9. B. मन्यंन, C. मत्यनु।
  10. B. C. चाक्षयो।
  11. C. पुट, I. पुटैर।
  12. C. सूत्रह्वलाटमध्यांतं।
  13. I. चाध for चार्ध suggested by the other Mss.
  14. After this line C. notices अस्मिन्स्थले पंचपत्रं न्यूनं and omits
    the remaining portion of this chapter and also the first 50 lines of the
    next chapter.
  15. B. स्रुड्डेा(श्रो)दधायकाये, I. सूत्रोदयं for सूत्रद्वयं suggested by the
    other Mss.
  16. I. द्वारं for द्वरन्तरं suggested by the other Mss.
  17. I. जघनं, B. जङ्घयोः।
  18. I. ख्वायतम् for मुज्वार्यतं suggested by the other Mss.
  19. (1) B. चल for नल। (2) B. षडंगुलं for रसाङ्गुलम्।
  20. B. शिर for शिव।
  21. I. प्रकोष्ठन्तु कटान्तं च, B. प्रकोष्ठात् कठिरन्तरं च।