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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 828, कुल 856 में से

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पृष्ठ 828

CHAPTER LVII
6. B. C. दशतालेन ।
9. B. पिंगलं चैव, C. पिङ्गलवर्णे for पीतवखैकम् ।
10. B. omits lines 10—11.
12. I. मौलिनाम् for मुनोनाम suggested by the context and the other Mss.
13. B. कुंबिकारं भवेत्कुक्षि एवं संपूर्णशोभितम् ।
C. कुब्जाकारं बृहत् कुंच वपु संपूर्णे ।
14. C. मन्यत्सामान्य, B. मंल्यत्वामान्यसे। दपं ।
15. I. मौली for मुनो, B. C. मौनि, see note 12.
16. C. कमंडलुं for पुस्तकम् ।
17. I. मौलिनाम् ।
21. After this line C. omits 34 lines with the remark अस्मिन्स पत्रमेकं न्यूनम् ।
22. (1) I. leaves in a lacuna भूतां which has been supplied by the other Mss.
(2) शूर is apparently for श्रोणि as suggested by the context.
23. B. स्यात् जंघादि घोर ।
24. B., first pāda, पादं जानुसमुच्चं स्यात्, I. ग्रीवतारं शरांशं which is a confusion with lines 20 and 28.
25. I. त्कोष्परं साधु, C. कूर्परं चार्थ, B. सार्थं ।
30. I. तद्विशादृ for न्तं विशालं suggested by the other Mss.
31. B. मध्यगत for मध्योदर ।
32. B. केदारे for कटितारं suggested by the other Mss.
34. B. नलताल॑ ।
35. B. बहिरग्ने, I. बाहुग्रीव (रप्र, on the margin).