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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 816, कुल 856 में से

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पृष्ठ 816

272 MĀNASĀRA
279. B. पतेन for यवेन।
281. B. भूनां, I. भूना।
282. B. शुद्धपीठो।
283. B. मानं वियुक्तं च न कुर्यात्, I. मानेन युक्तं चेत्।
284. I. तन्नं भर्ये स, B. तन्निभिर्यव।
286. B. त्रयं त्रयं।
288. I. इशुभायादि for यथाभागादि suggested by the other Mss.
290. B. omits lines 290-293.
297. B. प्राखालोतारमेव च।
298. B., second pāda, खात्तादाशिका।
300. I. संशये तु for स्वयम्भुव suggested by the other Mss. and the
context.
304. (1) I. चोर्ध्वगोवार्धः, B. चोर्ध्वधोबुद्धो। (2) I. पट्टसंमसरोरुदै।, B. पट्टजन्म
सरुहं।
305. B. द्वेक for चैक।
306. I. र्धनां for द्व्यंशं suggested by the other Mss.
308. B. चमद्यो, I. ग्रद्यो।
309. (1) B. सर्वांगाधिक। (2) I. धमो, B. यन्म। (3) B. मानयेत्।
310. B. रोक्त्वं for रोदयं।
311. I. वद्ववेत्, B. वर्जयेत्।
312. (1) B. पीठमध्ये तु कर्तव्यं; रन्ध्र for गन्ध is suggested by the reading in
line 317. (2) B. नाभस्य।
313. B. द्वयंशं तत्पातयेत्।
314. B. चैकारूपाधिके, I. leaves लिङ्ग in a lacuna.
315. I. स्वात्मा, B. चात्मा।
317. B. पदर्थेनं for परितो रन्ध्रे।
322. B. स्वर्क्ष चैव प्रपीठं।
323. B. वज्रलिङ्गेषु।
326. B. अथवा रत्नपीठं वा पीठमानं तु लिंगके।
327. B. वज्रादीनां च रत्नै(त्नै)श्च लिंगादीनां विशेषतः।
328. B. पवञ्चं for एककक्षं।
329. I. निमिति, B. न्यन्यानि।