मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें264 MĀNASĀRA
269. B. चक्राकृति, I. चित्रा कृति।
272. B. G. H. द्वित्रिवेद, द्वित्रिये।
276. Second pāda, B. ऊर्ध्वदेशेन चूलिका, G. H. चोर्ध्वद्वांशेन चूलिका, I.
चैकभाजनम्।
281. B. G. H. परितस्तु लुपायुक्तं खंडहर्म्यादिमंडितम्, I. पुरोक्तमुपयुक्त्या च,
G. H. दंडितम्।
282. G. H. पंचदशा।
290. B. G. H. योग्यकं, I. भोग्यकम्।
291. B. मुद्रिका, H. G. मुद्रका।
296. (1) B. घंटा च for कण्ठी च। G. H. leave this phrase in a lacuna.
(2) B. भाल, G. H. फाल।
297. B. चार्थ, G. चार्थ, H. चार्त, I. सार्थ।
298. (1) B. G. H. तत्सखे। (2) G. H. परितस्तु सेव्यं।
301. G. H. मालिका for चूलिका।
302. B. पूरिमादिरवेशकेजु, G. H. पूरयन्तभिरर्पितचूडकम्।
303. (1) B. H. शक्त, G. पूर्व, I. चक्र। (2) B. G. H. दिव्याल्कै।
304. I. नग for निक suggested by the other Mss.
305. G. H. सुमुखाः for गखपतेः।
306. (1) G. H. षणां परं। (2) B. मित्तिकै, G. H. मित्यके, for the last
word.
308. B. तस्मैरपि।
Colophon:—(1) B षट्पञ्चाश, G. H. नवचत्वारिंशं, I. पञ्चाश। (2) G. H.
इत्यादि मानसारः समाप्तः।