मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
DevanagariHindipublished856 पृष्ठ
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CRITICAL NOTES : CHAPTER XLII 241
73. (1) I''''पराय for यथापराध suggested by the other Mss.
(2) I. दण्डानांहि for हिंसां नाभि suggested by the other Mss.
75. I. स्वञ्नास्व for स्वे स्वे जन suggested by the other Mss.
76. I. स्वस्ति for स्तोकृत्य suggested by the other Mss.
77. I. स्याथ for न्याय suggested by the other Mss.
79. I. J. चमित्रं for चरित्रं suggested by the other Mss.
81. I. पत for पठ suggested by the other Mss.
82. (1) I. सतिनखवि, J सतु निखिल ।
(2) I. पट्टा, J. पादा । (3) J. बिन्दः, B. C. G. H. बिंदुः ।
Colophon :—I त्रि, B. सप्त, C. omits this, G. H. एक, J. द्विचत्वारिंशो ।
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