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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 779, कुल 856 में से

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पृष्ठ 779

CRITICAL NOTES : CHAPTER XL 235
135. I. विषाद for विपदा suggested by the other Mss.
136. B. कर, G. H. कूल for कम्प ।
145. (1) For बाह्ये, J. पार्श्वे । (2) I. व्याघ्रा, J. व्याघ्रका, B. व्यापका ।
146. I. **** किता, J. and the other Mss. देवादीन् किराता ।
147. I. तन्नये विधि तस्यांशे, J. तृतीये वितथे चांशे, B. द्वितीये ।
148. I. leaves in a lacuna न्धि विग्रह ।
149. I. मंतानन्ते, B. J. संतावरखे ।
150. I. वादमम् for वाहनम् suggested by the other Mss.
152. I. धियते for वियते suggested by the other Mss.
154. I. पुरमान्वितम् for गोपुरपुरकान्वितम् suggested by the other Mss.
155. B. प्रभुचित्तोपशांतये ।
156. B. G. H. J. कुर्याद्दोपो न विद्यते for the second pāda.
157. G. आश्रित for आवृत्त ।
158. (1) B. हस्तैश for हस्तेन । (2) G. H. मुनोरेन्द्र करखे, B. रक्षां कंगं कृत्वा ।
159. (1) B.G. H. त्रिद्यैक । (2) B. वेष, G. H. वेना I. J. वेन ।
Colophon :—(1) I. गृह for हर्म्य suggested by the other Mss.
(2) I. नामैक चत्वारिंशो, J. नामचत्वारिंशो, B. पंचचत्वारिंश,
G. H. नवत्रिंशो ।