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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 748, कुल 856 में से

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पृष्ठ 748

204 MĀNASĀRA
257. I. दृशा for दृश्वा suggested by J. and the other Mss.
259. I. श्वाष्टमं for ष्टद्वयं suggested by J. and the other Mss.
261. (1) I. J. द्वार। (2) I. दृष्टदिग्गर्भ for चेष्टदिग्गत, J. निर्गत, C. चेष्ट
टक्क दिर्गत।
262. I. सख्यैर्वासन, J. गोसंघैर्वास।
266. C. वल्लुरिका, B. मल्लुका, I. मसूरिक for मसूरक suggested by refer-
ences.
267. This is omitted by all the other Mss. except I.
270. (1) Lines 270–299, and 302–4 are missing here in B., but
the lines 270–299, and 302–2, are found later.
(2) I. तत्सम, J. तद्भद्र।
271. I. चन्द्र, J. and the other Mss. द्वयं'श।
273. C. तत्स गन्धिका।
276. B. त्यन्था for म्पन्था।
277. B. C. J. शेषन्तथाङ्गलम, I. शेषाङ्गुलम् for the last expression
suggested by the obvious sense and the other Mss.
278. I. J. भ्रम, B. भद्र।
284. I. स्तथा, J. तुवा।
285. I. कुर्यान्तन्त, J. दन्तर, B. तदधै।
286. J. खलूका, B. खलुतिका, C. खलुरका। (2) I. पि, J. वृत for पि। (3)
C. द्वित्रि।
287. J. इचैक for मेक।
288. I. वव, J. भ्रम, B. भव।
289. C. पंचशद्वां, B. पंचगं for पञ्चांशं।
290. I. बहि देशेतुप्रभां, J. बहिर्देशे प्रपां, B. बहिद्वारे।
291. I. मूलिका, J. मालिका, B. नालिका।
292. C. तत्तशारणसंयुक्तं, B. मत्तवारण संयुक्तं।
293. B. कर्णे कुकर, compare line 305 where the reading is कंकरी
which seems to bear some sense.