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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 739, कुल 856 में से

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पृष्ठ 739

CRITICAL NOTES: CHAPTER XXXIII 195
500. J. षोडशान्तं ।
502. J. तदायाम for चायाममिति ।
503. I. J. द्वात्रिं, B. स्याद्त्रिंशत् ।
504. B. पंक्ति विंशांशं च ।
505. B. भक्तोकं for त्रिवर्गकम् ।
506. B. मध्यभद्रकं for वार्थरुद्रकम् ।
508. (1) I. तन्त्सालं'''''''' for चान्तरालं च suggested by J. and the other
Mss.
(2) J., second pāda, कक्षेकूटं विशालकम् ।
509. I. मध्यकाला for मध्यशाला suggested by J. and the other
Mss., B. अंतरालं ।
511. B. द्विद्वि for द्विभागं ।
514. I. सान्त, B. शान्त, for चान्त suggested by J. and the other Mss.
515. J. लता for वल ।
516. (1) Before this line C. notices, यस्मिन्स्थले पत्रद्वयं न्यूनं ।
(2) B. C. J. खण्ड for कर्णे ।
519. I. भद्र for पक्ष suggested by J. and the other Mss., भद्रशाला is
already mentioned in line 518.
520. (1) I. निला for नीडा suggested by J. and the other Mss.
(2) I. वा सा for वापि वा suggested by the other Mss. and the
sense.
521. B. प्रति, C. प्रती, J. पोत ।
523. B. C. ललाटे for शालातटे ।
525. I. नवांशांशम, J. रंम for रंग्मं ।
526. B. तस्सादादा, J. तस्साददा ।
527. I. पतद्भू for वेदभू suggested by J. and the other Mss., and the
sense.
529. For भक्तितः, J. भागतः ।
531. (1) B. C. J. खण्ड for कर्णे । (2) B. वर्गाकारकम, C. कांचतंवर्गं ।
534. I. नां च''''''''पूर्वो for नानां चतुर्मूभ्यु suggested by J. and the other
Mss.
535. B. C. J. मांसं for प्रवेशं ।