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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 730, कुल 856 में से

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पृष्ठ 730

186 MĀNASĀRA
25. J. द्विगुणं for त्रिगुणं ।
26. I. ह्वा, for रम्यद्धि suggested by J. and the other Mss.
27. I. J. पञ्चादश for पञ्चदश suggested by C.
28. I. वर्धनात् J. वर्धयेत् C. वर्धना ।
29. (1) C. षष्टिहस्तावसानं, I. साष्टहस्तरतांशं ।
(2) J. दायत् C. दाधान, for दायामा
30. Lines 30--34, which are suggested by the context and have
been preserved by all other Mss. are missing in I.
31. C. omits the first pāda.
35. I. एक, J. चेक्क ।
36. C. शोभान for शोभादि and भक्ति for भित्ति ।
37. I. नाशं for शरांशं suggested by J. and the sense, C. शवांशं ।
38. C. J. भाग for नन्द
39. I नवभूमिरिकाले, for एवं तु द्वारशाले suggested by all other Mss.
and the sense.
40. C. पञ्चधा for पङ्क्ति ।
42. C. नन्द दशांशं ।
43. C. leaves the first pāda in a lacuna.
44. (1) I. वन्दि, वङ्कि for suggested by J. C. पदं । (2) I. समानां,
C. त्रिभाग J. सभागं ।
47. C. जनपादोायं for जन्मदादाय ।
48. (1) I. विशांशं for विशांतं suggested by J. and the other Mss.
(2) C. तथाष्टकम्, I. J. तथोदयम् ।
49. C. पादूर्ननं द्विगुणं मानुषेऽपिवा, a suggestion on the margin :--
मध्यमे (द्वारप्रसादे ), J. मानुषं ।
51. C. अधिकेन for हीनेन ।
54. J. हि for वा ।
56. C. ऊर्ध्वपीठं, I. J. उपपीठं ।
61. C. second pāda, सर्वेषु गोपुरातकं ।
74. (1) I. परि for रति suggested by J. and supported by the sense.
(2) C. हस्तद्वारे तु वर्द्धना for the second pāda.