मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
DevanagariHindipublished856 पृष्ठ
पृष्ठ 723, कुल 856 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 723
CHAPTER XXXII
The first 13 lines of this chapter are missing in C.
- J. प्राकारान्तः।
- (1) I. साष्ट, J. चाष्ट। (2) I. सान्त, J. चान्त, B. चतुर।
- J. चान्त, B. नातरुह्वके for the last expression.
- B. J. वा for च in both the places.
- J. वा for च।
- B. चार्यम for चार्यक।
- (1) B. हर्म्यार्धे, J. हर्म्यैकं। (2) J. न्द्रे for तु।
(3) B. शुभं for गृहं। - (1) J. दिवः। (2) B., second pāda, चंदशालायमेववा।
- I. याथ for वाथ suggested by J. and the other Mss.
- B. तन्मध्ये for पश्चिमे।
- (1) I. प्रत्येकं for प्रत्यङ् suggested by J. and the other Mss. (2) I.
एक, J. चैक।
(3) C. पाधि for पादे, B. चैदेश्वरा। - (1) C. J. मस्योत्तरे for पश्चिमे।
(2) I. साच for चाश्विनी suggested by all other Mss. - (1) I. म****हल्या, B. मनोज्ञस्या, J. मनोन्मन्या, C. मनोज्ञैर्या।
- I. शंस्याद्वा for शस्य वा suggested by B. C.
- J. पट्टकं, B. वारकं, C. वयत्तं for वट्टक।
- I. कृ for क suggested J., C. परिवारालयं।
- (1) C. J. पर्यके, B. तत्सखं for सत्यके। (2) I. नदि for नन्दि, suggested
by the other Mss. J. नादि। - (1) C. J. मृशो चा, B. भृंगिं च।
(2) B. घर्यें चां, C. साद्धंसांत