मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें164 MĀNASĀRA
28. J. तन्मध्य for मध्यं ।
30. (1) I. B. विभाग, J. द्विभाग । (2) I. B. सपञ्जरम्, C. समुन्नतं for समन्वितम् ।
31. (1) I. adds अथवा at the beginning, but omits कूट of कूटशाले
suggested by J., C. शाल्यंचेव । (2) C. J. भद्रकम्, and omits शरांश ।
34. (1) I. द्विंश, J. द्वयं श । (2) B. वत्स्ये, C. कपत्ति for वक्ष्ये ।
36. J. हर्म्ये चाष्टेतले ।
38. (1) C. omits the first pāda. (2) B. ततं भवेत्, C. तलोत्तावत for the
last expression.
41. B. खंड for कर्ण ।
42. J. शा for कू । (2) B. शालकं for शालानां ।
44. I. निद्दे, C. निदै for नीडै suggested by J.
Colophon :-I. अष्टत्रिंश, B. एकत्रिंश for सप्तविंशो suggested by J. and
the contents, C. leaves out the last expression (from नवतल) ।