मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंMĀNASĀRA 157
36. (1) B. त्रिवायुक्तो। (2) J. चोध्र्वैंचोध्र्वं, B. चाधोर्धैकल।
(3) J. त्रितळात्। (4) I. चमलब्धकृतम्, J. प्रयोजयेत् for न्यसेत् supplied
by the other Mss.
39. B. शाला वा, J. शाला।
40. B. कपालेतु for कपोतान्तं।
41. (1) J. रोच। (2) I. क्षुद्रकपोत, J. कर्करीकृत, B. कुकलीकृत।
42. J. वंश, B. सवंश, I. विंशा।
44. I. युक्त for यत्त suggested by J.; B. यत्नतो परिकल्पयेत्।
45. J. मूलं स्यावृतलिन्दकम्, B. मूलस्यतृत्ति लिंगकं, I. J. मूलं व्यावृताकम्।
46. (1) J. एक for चैक suggested by J. (2) I. लिङ्ग, J. लिन्द्र for लिन्द।
47. (1) B. दूतरे for पद्धतलं। (2) I. प्रत्या, J. युक्त्या, B. कुर्यांच्च।
48. B, देवानां पादकोष्ठके।
49. (1) J. शिवश्चेन्द। (2) I. कक्षं for कुरु suggested by J., B. ब्रह्मा
विष्णुः शिवश्चन्द्रकादयः सहसंकुरे हर्म्यं पूर्ववत्परिकल्पयेत्।
Colophon:—I. पञ्च, B. षट् for चतुर्विंशो suggested by J.