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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 689, कुल 856 में से

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CRITICAL NOTES : CHAPTER XIX 145
232. I. तं देशेकोशे, B. देशे तु ।
233. J. C. मूर्ध्न, B. पक्ष for मूर्ध्वे ।
234. B. C. देवान्य, J. देवान्यू for देवान् पुरश्च ।
235. (1) B. C. J. पतत् for एवं । (2) B. वाहनमोक्षमंस्य, C. विनोक्षमस्य ।
236. (1) B. C. तत्तद्वाहन । (2) I. तलोपेतमं । (3) J. पमंतं ।
237. B. मानेनदिग्देव, J. मानज्ञानेदिति ।
238. B. नवतितं, C. नवतितलं, J. नवनीत for वनिताम् ।
C. omits the next 3 lines.
239. B. देशे मदत् ।
240. (1) B. क्षत्रियां for हरिं वा । (2) B. चतुष्ठाखो ।
241. (1) B. चासनं