मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
पृष्ठ 676, कुल 856 में से
संदर्भ में पढ़ें132 MĀNASĀRA
235. (1) A. C. F. कर्णात्कणो, B. कण्ठात्, I. J. कन्या। (2) A. B. C. F.
नीत्वा सूत्रं।
236. I. J. धो for धौ।
237. (1) A. F. वित्वा, B. खित्वा, C. चित्वा for चत्वा। (2) A. F. J.
चित्र, C. क्षुव for सूत्रा।
238. I. चन्द्रमये for चन्द्रं यद्ये suggested by J. and the other Mss.
239. B. वाजमानास्त, I. J. वासनान्त।
240. A. F. J. छिद्रसूत्रादधो, I. चित्र सूत्रं तथा।
241. (1) I. तञ्चित्रे, A. B. C. F. J. तच्छिद्रे। (2) A. F. J. धारासु,
I. तारं। (3) A. B. C. F. J. वित्तमः, I. नमम्। (4) वित्तम is an impossible
form, obviously it stands for शिष्यवित्तमः।
242. (1) J. श्रोण्यां। (2) I. मधु for मध्य। (3) I. कम् for का।
After this F. reads अथकामकोष्ठविधिः and A. F. करवोरबहु, कामकोष्ठविधिं
वक्ष्ये शृणुध्वं तत् प्रभंजना। Here A. F. leave मानसार and take up another
different Ms. called पद्मसंहिता।
In addition to this F. contains a portion of another Mss. This
portion deals with gopura or gate-houses.
243. (1) B. करेविरवसापूर्व, C. करवोरेविराबाहुं। (2) I. पुटान्तं for पुटारं।
244. I. कर्षायां च, J. कर्णाच्छाया।
246. C. J. वाहुल।
247. I. J. दलो भवेत्।
248. I. बहुपाकखैकगठेपु, J. and the other Mss. बहुबाहु लुपाकणैंषु।
249. (1) B. C. कूटो for कटका। (2) J. omits तु and reads प्रयोजयेन्।
251. B. जया, C. यथा।
252. B. ममळा, C. मामला।
253. (1) I. च, J. चा। (2) J. तथा for तदा।
255. C. हम्येतं।
257. I. रुद्र for शूद्र।
258. (1) I. रुद्र, J. मस्य for मध्य। (2) I. पतक्तं for पतत्।
259. I. दैवता for सुखदप्रदा।