मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
DevanagariHindipublished856 पृष्ठ
पृष्ठ 673, कुल 856 में से
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CRITICAL NOTES : CHAPTER XVIII 129
95. I. युक्ताथो, J. वृत्ताथो, B. second pāda, मेतद्भागं यथाक्रमं ।
96. A. F. द्विश्रृंगं, C. दंश्रुकं, J. शंश्रकं, I. विश्रकं ।
98. (1) I. चापि for वापि । (2) I. घो for धो ।
101. I. द्विश्व for द्वश्व ।
103. I. रश्मि, B. रश्लि ।
104. I. चतुर्थकं for चतुर्विध ।
105. A. B. C. F. दुक्त मान्त ।
106. A. F. यचि, B. छत, C. अद for यद्य ।
107. I. तु for चैक ।
111. I. शानां for शैकां । (2) I. लोक्तम्, J. लान्तकम् ।
115. (1) J. कुम्भोर्ध्वे चा for ऊर्ध्वं च सा । (2) A. F. C. J. दलिक