मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
पृष्ठ 657, कुल 856 में से
संदर्भ में पढ़ेंCRITICAL NOTES: CHAPTER XV 113
381. (1) I. तुमुरक्त for स्याद्द्वल। (2) A. F. तो पठं, B. भावदं for the
last expression.
382. I. दान्तं शिखाँ for दार्ताभिमुखे।
383. J. प्रवेशे for प्रदेशे।
384. (1) B. मृहडपं for चक्षिप्तं। (2) I. कुर्या for ब्रोह्य।
385. I. पश्च for चग्र।
386. (1) For कुम्भं, J. लम्ब। (2) For भि, J. दि।
387. I. कपटान्तं करख्यादि, A. F. J. कर्पटांतः करख्यादि, B. कर्पटंतु
शिरोषादि।
389. J. शाल्थैः।
390. I. अग्रतः for अग्रकम्।
391. J. कल्पनम्।
392. I. मा for चा।
393. B. पल्लवान् कृत्वा, A. F. द्वयां नय for the first expression.
394. I. भानि चा भवेत् for हृदि चावहेत्, A. F. हानि चावहे।
395. B. रूपयेद्ह्वं।
396. (1) I. नन्दना for चन्दनं वापि। (2) I. पद्म for पुण्ड्रं।
397. B. सपत्रित्रंकरं for the first expression.
399. I. पूजयापि for पूजयेत्तु।
400. I. देह्याक्त, the other Mss. देह्याव।
402. I. रक्तस्यव for रत्न धिया।
403. I. अर्प, other Mss. अर्च।
405. I. शिल्पं संस्थाप्य, J. शिल्प्यो संप्राप्य, B. शिल्पिनं प्राप्य।
406. (1) A. F. गैरिका मृत, B. गैरिकावृत। (2) B. शत, A. F. ततः।
407. J. सूची।
409. (1) A. B. F. J. हेमा for द्विमा। (2) J. तं for तन्, thus making
स्तम्भ masculine.
410. I. अयो शि for ततो धि।
413. J. देशके।
414. I. श्यानि for ह्य च।
415. (1) A. F. वदनं चाधरं, B. वदानं च दाह, J. मानं च धारं, I. पूर्वमाधारं,
and पूर्वदनं धारं, where the same line is repeated owing to a confusion.
(2) I. J. A. F. प्रोक्ष्य, B. प्रोक्ष्यण।
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