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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

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CRITICAL NOTES : CHAPTER XIII 87
140. I. J. द्विगुणा ।
141. I. J. दण्डमानेन for हस्तमानेन, which has been described in 133.
143. A. F. वार्धनिर्गमं ।
145. (1) A. F. B. भाग for भागपादादि । (2) B. मुद्दनो for मूर्द्धं । (3) A. F.
वशां, B. विशां for वशात् ।
146. A. F. पद्मजात्येन, B. तन्न ।
148. B. मंदीन, A. F. नादीनि कंपयेत् ।
149. (1) B रत्न । (2) I. J. रक्तैराद्य for पत्रायै suggested by the
other Mss.
150. I. J. अन्येरुपमल for अन्यैर्युक्तं स्थलं ।
151. A. F. कोषेषां मकरे, B. कर्षोषां मकरैः प्रकरं कृतं ।
F. omits the next three lines.
152. (1) A. F. तरै, B. तरे, व्याघ्र । (2) I. J. सिह्ना for सिंहा ।
153. A. F. अश्वे भद्रेण, B. बिभदध्रेण ।
154. B. न्यान्यान्युक्तानि सर्वेषां ।
Colophon :—I. A. चतुर्दशो, B. सप्तदशो for त्रयोदशो ।