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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 617, कुल 856 में से

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पृष्ठ 617

CRITICAL NOTES : CHAPTER XI 73
106. I. तन्त्रि, A. F. वितन्त्र विततष्टैः।
107. A passive verb like the one within brackets must be
supplied in order to make the use विधिः in the preceding line and
पूर्वैकादि here possible, even if the metre of this line be ignored.
108. (2) J. त्रिगुणात् for द्विगुण। (3) I. वधोचि, J. यार्धाधिक्य, A. F.
बाध्याधिक।
109. (1) J. शान्तद्धांशं, A. F. सांताध्यायं सक। (2) A. F. श्रीपाद for
त्रिपाद।
110. (1) I. पाष्ठि for पौष्टि। (2) I. द्वि for वि।
111. (1) A. F. क्रिया (त्रिया) for त्र्यंश। (2) I. J. द्वात्रिंशमाधिकं,
A. F. त्रिंशकमाधिक्यं बाया।
112. A. F. पतासां।
The lines 113 to 121 are lost in J.
113. A. B. पुरैरे।
118. A. F. शिरान्तं, I. J. शालान्तं।
119. A. F. खलान्तं शिवान्तं वा for the second pāda.
120. B. चाद्यो for अन्यो।
121. (1) I. J. add कान्तं before स्यात् and read तुङ्ग without a विभक्ति।
(2). A. F. चैतत् महत् गोपुरे चोत्तरांतं । (2) A. F. हस्त।
122. A. F. भूमाक्ष्यते।
123. (1) I. adds क्षुद्र after चारम्य। (2) A. F द्विट्टि for द्वित्रि।
124. I. नवम्यन्तं।
The lines 125 to 128 are lost in J.
125. A. F. पूर्वेवत्स्को; the usual form in such places is the one
suggested within brackets.
126. (1) A. F. जातिहस्ते। (3) A. F. कादिशर।
128. I. प्रभाकरस्य for प्राहारकस्य।
129. I परभाकुशाला।
130. (1) I. दन्त for दृष्ट। (2) J. तलान्तात्। (3) I. नगे for नरे।
131. I. A. F. त्रितलं, J. भूतलं for त्रितलादि न।
132. (1) I. न्तका for चर्का, A. F. J. दर्का।
136. (1) B. गक्षिकानां for गभस्तिकादीनां, A. F. J. omit this word. (2)
A. F. युध, B. चौदपानां च प्रयायि।