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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

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संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 504

झषाकार, १३६।
'ड', डमरुक, डिण्डिम, डिण्डिमाकार
'त', तक्षक (2 lines), तटाक
Total right lines: 23 + 2 + 4 + 4 = 33 lines.
They don't even align perfectly one-to-one horizontally! So it is indisputably a two-column layout intended to be read column by column.

Let's double-check all words and numbers:

  • Header: ४७० ] मानमारे
  • जय, २१८।
  • जयद, ५७, ५८, ५९, ६०, २४३।
  • जयन्त, २२, २३, ४०, ४१, ४३, ६६।
  • जयन्तिक, ११६, ११७, २१२।
  • जयन्तिका, ११५।
  • जयन्ती, ११२।
  • जलगर्भ, ७०।
  • जलद्वार, ४३, १९१, २६५।
  • जलधार, ३५३।
  • जलपाद, २३७।
  • जलपूरितमण्डप, १९४।
  • जलसंपूरितार्थ (मण्डप), २२७।