सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 371, कुल 856 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 371

३३६ मानसारे [अध्यायः
दक्षिणो त्वभयं पूर्वं सव्ये चापर(रे) चक्रयुक् ।
अपरे वामहस्ते तु पाञ्चजन्यावधारणम् ॥ २६ ॥ 52
तत्समं कर्णपत्रं स्यात्कुर्यान्मकरकुण्डलम् ।
प्रसन्नवदनं तुङ्गं नासि दीर्घाक्षिशोभितम् ॥ २७ ॥
हारोपग्रीवसंयुक्तं यज्ञसूत्रोत्तरीयकम् ।
रत्नोदरबन्धं स्याद् बाहुमालाविभूषितम् ॥ २८ ॥ 56
कटकं कटिसूत्रं च केयूरं रत्नपूरितम् ।
रत्नाङ्गुलीयकैर्युक्तं पादजालविभूषितम् ॥ २९ ॥
नलकान्तं चलान्तं स्यात्पीताम्बरविलम्बनम् ।
शिरश्चक्रं शिरःपृष्ठे युक्तं सर्वाङ्गभूषणम् ॥ ३० ॥ 60
द्वयोर्जङ्घावसानं स्याद् वनमालामनोहरम् ।
एवं तु विष्णुमूर्तिः स्याच्छक्तियुक्तं(क्ता) तु पार्श्वयोः ॥ ३१ ॥
त्रि(श्री)भूमिं