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सर्वकोश
मल्लपुराण (ज्येष्ठिमल्ल - प्राचीन भारतीय मल्लविद्या, अखाड़ा व्यायाम व कुश्ती महाग्रन्थ)

मल्लपुराण (ज्येष्ठिमल्ल - प्राचीन भारतीय मल्लविद्या, अखाड़ा व्यायाम व कुश्ती महाग्रन्थ)

Malla Purana: Ancient Indian Wrestling & Martial Arts

ज्येष्ठिमल्ल परम्परा (सम्पादक: भोगीलाल ज. सांडेसरा एवं आर. एन. मेहता) द्वारा

DevanagariSanskritpublished141 पृष्ठ

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पृष्ठ 115

युद्धकला ॥ १७ ॥ ताम्रचूडकला ॥ १८ ॥ मेषकला ॥ १९ ॥ पक्षिकला ॥ २० ॥
रणकला ॥ २१ ॥ मण्डनकला ॥ २२ ॥ वस्त्रकला ॥ २३ ॥ नीतिकला ॥ २४ ॥
सर्वशास्त्रकला ॥ २५ ॥ लेखनकला ॥ २६ ॥ गन्धकला ॥ २७ ॥ ज्योतिःशास्त्रकला
॥ २८ ॥ वैद्यकला ॥ २९ ॥ विषकला ॥ ३० ॥ भूतकला ॥ ३१ ॥ मन्त्रकला ॥ ३२ ॥
तन्त्रकला ॥ ३३ ॥ नियुद्धकला ॥ ३४ ॥ इन्द्रकला ॥ ३५ ॥ वृक्षकला ॥ ३६ ॥
धातुकला ॥ ३७ ॥ व्यापारकला ॥ ३८ ॥ शिल्पकला ॥ ३९ ॥ भूमिकला ॥ ४० ॥
कर्मकला ॥ ४१ ॥ स्वेदकला ॥ ४२ ॥ भुजकला ॥ ४३ ॥ वाद्यकला ॥ ४४ ॥
स्थैर्यकला ॥ ४५ ॥ शौर्यकला ॥ ४६ ॥ मणिकला ॥ ४७ ॥ परहि(चि)त्तरञ्जनकला ॥ ४८ ॥
परचित्तज्ञानकला ॥ ४९ ॥ शत्रुकला ॥ ५० ॥ रथकला ॥ ५१ ॥ आयुधकला ॥ ५२ ॥
मृगकला ॥ ५३ ॥ दानकला ॥ ५४ ॥ ग्रहणकला ॥ ५५ ॥ दूतकला ॥ ५६ ॥
नाटककला ॥ ५७ ॥ पलायनकला ॥ ५८ ॥ क्रीडाकला ॥ ५९ ॥ शयनकला ॥ ६० ॥
आसनकला ॥ ६१ ॥ मानकला ॥ ६२ ॥ परीक्षाकला ॥ ६३ ॥ सैन्यकला ॥ ६४ ॥
इति चतुःषष्टिकलाः ।
सूतकाधिकृतश्चैव अन्तःपुरनिवारणम् ॥ ५८ ॥
यानीयरक्षकाःस्कन्धधराश्चेटकवेदिनः ।
वणिका व्यवहारज्ञा ज्ञेया रत्नपरीक्षकाः ॥ ५९ ॥
वेश्याश्चैव विलासिन्यो लेखका दूतकारकाः ।
दासाश्चैव तु भृत्याश्च गजवैद्यास्तथापरे ॥ ६० ॥
कौतूहलकराः प्रोक्ता रसवाक्यविदस्तथा ।
इति युक्तिविदश्चैव गन्धयुक्तिविदस्तथा ॥ ६१ ॥
हास्यकाराः कथाकारा युद्धेषु कुशलास्तथा ।
देशमायाविदश्चैव काव्यादिकुशलास्तथा ॥ ६२ ॥
अनेकभाषाकुशलाः कवितायां तथैव च ।
क्रीडायां कुशलाश्चैव धूर्तकर्मविदस्तथा ॥ ६३ ॥
धातुवादविदः केचिन्नौकाकर्मविदस्तथा ।
अग्निस्तम्भो जलस्तम्भो मन्त्रवादस्तथापरः ॥ ६४ ॥