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महानिर्वाण तन्त्र (हिन्दी अनुवाद सहित)

महानिर्वाण तन्त्र (हिन्दी अनुवाद सहित)

Mahanirvana Tantra with Hindi Translation

शिव-पार्वती संवाद द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर · कल्याण मन्दिर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished139 पृष्ठ

पृष्ठ 9, कुल 139 में से

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पृष्ठ 9

उक्त तालिका के अनुसार वङ्गवासी-संस्करण के उल्लास १, ३ और ४ में क्रमशः २, १ और ३
श्लोक अधिक प्रतीत होते हैं, किन्तु दोनों के पाठों के मिलान करने पर ज्ञात होता है कि 'एवेलॉन' ने अर्थ
की पूर्णता को देखते हुए कहीं-कहीं तीन पंक्तियों का और कहीं एक पंक्ति का श्लोक मान लिया है; जैसे
प्रथम उल्लास के श्लोक २८, ३५, ५०, ५७, ६६ तीन-तीन पंक्तियों के हैं, जबकि श्लोक ७० एक पंक्ति का
है, जब कि वङ्गीय संस्करण में सभी श्लोक दो-दो पंक्तियों के हैं। फलतः इस संस्करण की श्लोक-संख्या
तो ७४ है, जब कि एवेलॉन-संस्करण में वह घट कर ७२ रह गई है। यही बात अन्यत्र भी है। अतः तीनों
संस्करणों की श्लोक-संख्या वस्तुतः समान ही है।
प्रस्तुत 'हिन्दी महा-निर्वाण तन्त्र' में अनुवाद के साथ दी गई श्लोक-संख्या अप्राप्य 'सरकार'-
संस्करण के अनुरूप है, किन्तु थोड़ा ही ध्यान देने से सम्बन्धित मूल श्लोक 'एवेलॉन'-संस्करण में
जिज्ञासु पाठक देख सकते हैं। अनुवाद करने में यह सावधानी रखी गई है कि मन्त्र, ध्यान, स्तोत्रादि का
मूल संस्कृत पाठ भी उद्धृत रहे, जिससे केवल इसी संस्करण की सहायता से साधक बन्धु अपनी उपासना
में इस उपयोगी तन्त्र की बातों का उपयोग कर सकें। साथ ही पहले-पहल इस तन्त्र में उल्लिखित मुख्य
पूजा-यन्त्रों के रेखा-चित्र भी इस संस्करण में प्रकाशित किए गए हैं। यही नहीं, अप्राप्य 'सर्वोल्लास तन्त्र'
में इस तन्त्र के जो दुर्लभ वचन दिए गए हैं, उन्हें भी परिशिष्ट में उद्धृत कर दिया गया है। आशा है कि इन
विशेषताओं से युक्त यह संस्करण पाठकों के लिए विशेष उपयोगी सिद्ध होगा। इसी में हमारे परिश्रम की
सार्थकता है।
-'कुल-भूषण'
प्रयाग
चैत्र पूर्णिमा, २०३९
नवनाभ-मण्डल (पृष्ठ ८८) पञ्चाब्ज-मण्डल (पृष्ठ ८८)
(आठ)