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महानिर्वाण तन्त्र (हिन्दी अनुवाद सहित)

महानिर्वाण तन्त्र (हिन्दी अनुवाद सहित)

Mahanirvana Tantra with Hindi Translation

शिव-पार्वती संवाद द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर · कल्याण मन्दिर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished139 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 139 में से

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पृष्ठ 6

प्राक्कथन
'महा-निर्वाण तन्त्र' का महत्त्व
(द्वितीय संस्करण में प्रकाशित)
'महा-निर्वाण तन्त्र' का महत्त्व इसी से समझा जा सकता है कि दरभङ्गा-नरेश स्व० महाराजाधिराज
श्री रमेश्वर सिंह, जो अपने समय के एक सिद्ध कौल साधक थे एवं सर जॉन वुडरफ (कलकत्ता उच्च
न्यायालय के न्यायाधीश) द्वारा तत्कालीन उच्च कोटि के तान्त्रिक विद्वानों के सहयोग से बीसवीं शताब्दी के
प्रारम्भ में कलकत्ते में संस्थापित 'आगम अनुसन्धान समिति' के तत्त्वावधान में सन् १९२९ में इस ग्रन्थ
को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया गया। यही नहीं, 'आर्थर एवेलॉन' के उपनाम से स्व० वुडरफ ने इस
तन्त्र का पूर्ण अंग्रेजी भावानुवाद भी 'ग्रेट लिबरेशन' नाम से उक्त संस्था द्वारा प्रकाशित कराया था। इस
सम्बन्ध में यह भी उल्लेखनीय है कि बङ्गाल में उन दिनों समाज-सुधार की अग्रणी संस्था 'ब्राह्म-समाज'
थी, जिसके प्रख्यात कर्णधार राजा राममोहन राय और उनके गुरु स्वामी हरिहरानन्द भारती ने 'ब्राह्म-
समाज' द्वारा प्रवर्तित ब्राह्म-धर्म के उपदेशों की रचना इसी तन्त्र के आधार पर की थी। स्वामी जी ने इस
तन्त्र के मूल श्लोकों की संस्कृत-टीका भी लिखी थी, जो समिति द्वारा प्रकाशित 'महा-निर्वाण तन्त्र' में
मूल के साथ छपवा दी गई थी और वह आज भी उपलब्ध है।
संवत् १९६० में प्रकाशित भाषा-टीका-सहित 'महा-निर्वाण तन्त्र' की भूमिका में पण्डित
बलदेवप्रसाद मिश्र (दीनदार पुरा, मुरादाबाद) द्वारा लिखित निम्न कथन ध्यान देने योग्य है-
"...तन्त्रसार में महा-निर्वाण तन्त्र का नाम नहीं लिखा है। इस कारण से कोई-कोई महात्मा इस
ग्रन्थ की प्रामाणिकता में संशय करते हैं। ऐसी शङ्का करनेवालों को उचित है कि पद्म-पुराण, अग्नि-पुराण
और शङ्कर-विजय को पढ़कर अपने सन्देह को दूर करें। कुलार्णव तन्त्र और इस महा-निर्वाण तन्त्र में
ब्रह्मोपासना की विधि व प्रकरण वर्तमान हैं। "...पं० जीवानन्द विद्यासागर की मूल मुद्रित पुस्तक के
अतिरिक्त हमको दो प्राचीन लिखित पुस्तकें भी मिलीं, जिनमें से एक ७५० वर्ष पूर्व की है।..."
इसके अतिरिक्त इस तन्त्र के अन्य संस्करण प्रकाशित हुए, जिनका विवरण आगे दिया गया है। इन
तथ्यों के साथ ही अनुक्रमणिका के अनुसार जो विषय इस तन्त्र में वर्णित हुए हैं, उनसे यह स्पष्ट रूप से
अनुभव होता है कि तान्त्रिक साधना के सम्बन्ध में यह एक श्रेष्ठ शिक्षा-प्रद ग्रन्थ है।
हस्त-लिखित पाण्डु-लिपियाँ
महा-महोपाध्याय स्व० गोपीनाथ कविराज ने सन् १९७२ में प्रकाशित अपने 'तान्त्रिक साहित्य'
ग्रन्थ, पृष्ठ ४९१-९२ में 'महा-निर्वाण तन्त्र' की छः हस्त-लिखित पाण्डु-लिपियों का उल्लेख किया है,
जिनके विवरण का सारांश निम्न प्रकार है-
१. एशियाटिक सोसायटी बङ्गाल सूची-पत्र, सं० ६०३९-प्रथम भाग के १९ पटल। इसका
प्रकाशन हो चुका है।
(पाँच)