महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 685, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंनामृतेनामृतं पीतं वत्सपीता न वत्सला ।
इमाँल्लोकान् भरिष्यन्ति हविषा प्रस्रवेण च ॥ २६ ॥
आसामैश्वर्यमिच्छन्ति सर्वेऽमृतमयं शुभम् ।
'जैसे वायु, अग्नि, सुवर्ण, समुद्र और देवताओंका पीया हुआ अमृत—ये वस्तुएँ उच्छिष्ट नहीं होतीं, उसी प्रकार बछड़ोंके पीनेपर उन बछड़ोंके प्रति स्नेह रखनेवाली गौ भी दूषित या उच्छिष्ट नहीं होती। (तात्पर्य यह कि दूध पीते समय बछड़ेके मुँहसे गिरा हुआ झाग अशुद्ध नहीं माना जाता।) ये गौएँ अपने दूध और घीसे इस सम्पूर्ण जगत्का पालन करेंगी। सब लोग चाहते हैं कि इन गौओंके पास मंगलकारी अमृतमय दुग्धकी सम्पत्ति बनी रहे' ॥ २५-२६½ ॥
वृषभं च ददौ तस्मै सह गोभिः प्रजापतिः ॥ २७ ॥
प्रसादयामास मनस्तेन रुद्रस्य भारत ।
भरतनन्दन! ऐसा कहकर प्रजापतिने महादेवजीको बहुत-सी गौएँ और एक बैल भेंट किये तथा इसी उपायके द्वारा उनके मनको प्रसन्न किया ॥ २७½ ॥
प्रीतश्चापि महादेवश्चकार वृषभं तदा ॥ २८ ॥
ध्वजं च वाहनं चैव तस्मात् स वृषभध्वजः ।
महादेवजी प्रसन्न हुए। उन्होंने वृषभको अपना वाहन बनाया और उसीकी आकृतिसे अपनी ध्वजाको चिह्नित किया, इसीलिये वे 'वृषभध्वज' कहलाये ॥
ततो देवैर्महादेवस्तदा पशुपतिः कृतः ।
ईश्वरः स गवां मध्ये वृषभाङ्कः प्रकीर्तितः ॥ २९ ॥
तदनन्तर देवताओंने महादेवजीको पशुओंका अधिपति बना दिया और गौओंके बीचमें उन महेश्वरका नाम 'वृषांक' रख दिया ॥ २९ ॥
एवमव्यग्रवर्णानां कपिलानां महौजसाम् ।
प्रदाने प्रथमः कल्पः सर्वासामेव कीर्तितः ॥ ३० ॥
इस प्रकार कपिला गौएँ अत्यन्त तेजस्विनी और शान्त वर्णवाली हैं। इसीसे दानमें उन्हें सब गौओंसे प्रथम स्थान दिया गया है ॥ ३० ॥
लोकज्येष्ठा लोकवृत्तिप्रवृत्ता
रुद्रोपेताः सोमविष्यन्दभूताः ।
सौम्याः पुण्याः कामदाः प्राणदाश्च
गा वै दत्त्वा सर्वकामप्रदः स्यात् ॥ ३१ ॥
गौएँ संसारकी सर्वश्रेष्ठ वस्तु हैं। ये जगत्को जीवन देनेके कार्यमें प्रवृत्त हुई हैं। भगवान् शंकर सदा उनके साथ रहते हैं। वे चन्द्रमासे निकले हुए अमृतसे उत्पन्न हुई हैं तथा शान्त, पवित्र, समस्त कामनाओंको पूर्ण करनेवाली और जगत्को प्राणदान देनेवाली हैं; अतः गोदान करनेवाला मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओंका दाता माना गया है ॥ ३१ ॥