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महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 5, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 5

१६- उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल
१७- शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल
१८- शिवसहस्रनामके पाठकी महिमा तथा ऋषियोंका भगवान् शंकरकी कृपासे अभीष्ट सिद्धि होनेके विषयमें अपना-अपना अनुभव सुनाना और श्रीकृष्णके द्वारा भगवान् शिवजीकी महिमाका वर्णन
१९- अष्टावक्र मुनिका वदान्य ऋषिके कहनेसे उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान, मार्गमें कुबेरके द्वारा उनका स्वागत तथा स्त्रीरूपधारिणी उत्तरदिशाके साथ उनका संवाद
२०- अष्टावक्र और उत्तर दिशाका संवाद
२१- अष्टावक्र और उत्तरदिशाका संवाद, अष्टावक्रका अपने घर लौटकर वदान्य ऋषिकी कन्याके साथ विवाह करना
२२- युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण
२३- देवता और पितरोंके कार्यमें निमन्त्रण देनेयोग्य पात्रों तथा नरकगामी और स्वर्गगामी मनुष्योंके लक्षणोंका वर्णन
२४- ब्रह्महत्याके समान पापोंका निरूपण
२५- विभिन्न तीर्थोंके माहात्म्यका वर्णन
२६- श्रीगंगाजीके माहात्म्यका वर्णन
२७- ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतंगकी इन्द्रसे बातचीत
२८- ब्राह्मणत्व प्राप्त करनेका आग्रह छोड़कर दूसरा वर माँगनेके लिये इन्द्रका मतंगको समझाना
२९- मतंगकी तपस्या और इन्द्रका उसे वरदान देना
३०- वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा
३१- नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन
३२- राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति
३३- ब्राह्मणके महत्त्वका वर्णन
३४- श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी प्रशंसा
३५- ब्रह्माजीके द्वारा ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन
३६- ब्राह्मणकी प्रशंसाके विषयमें इन्द्र और शम्बरासुरका संवाद
३७- दान-पात्रकी परीक्षा