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सर्वकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 382, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 382

उसने दुर्धर योगका अनुष्ठान किया। उसका सारा शरीर अत्यन्त दुर्बल हो गया। नस-नाड़ियाँ उबड़ आयीं। धर्मात्मा मतंगका शरीर चमड़ेसे ढकी हुई हड्डियोंका ढाँचामात्र रह गया। उस अवस्थामें अपनेको न सँभाल सकनेके कारण वह गिर पड़ा—यह बात हमारे सुननेमें आयी है॥ ६॥

तं पतन्तमभिद्रुत्य परिजग्राह वासवः।
वराणामीश्वरो दाता सर्वभूतहिते रतः॥ ७॥
उसे गिरते देख सम्पूर्ण भूतोंके हितमें तत्पर रहनेवाले वर देनेमें समर्थ इन्द्रने दौड़कर पकड़ लिया॥

शक्र उवाच

मतङ्ग ब्राह्मणत्वं ते विरुद्धमिह दृश्यते।
ब्राह्मण्यं दुर्लभतरं संवृतं परिपन्थिभिः॥ ८॥
इन्द्रने कहा—मतंग! इस जन्ममें तुम्हारे लिये ब्राह्मणत्वकी प्राप्ति असम्भव दिखायी देती है। ब्राह्मणत्व अत्यन्त दुर्लभ है; साथ ही वह काम-क्रोध आदि लुटेरोंसे घिरा हुआ है॥ ८॥

पूजयन् सुखमाप्नोति दुःखमाप्नोत्यपूजयन्।
ब्राह्मणः सर्वभूतानां योगक्षेमसमर्पिता॥ ९॥
जो ब्राह्मणका आदर करता है वह सुख पाता है, और जो अनादर करता है वह दुःख पाता है। ब्राह्मण समस्त प्राणियोंको योगक्षेमकी प्राप्ति करानेवाला है॥ ९॥

ब्राह्मणेभ्योऽनुतृप्यन्ते पितरो देवतास्तथा।
ब्राह्मणः सर्वभूतानां मतंग पर उच्यते॥ १०॥
मतंग! ब्राह्मणोंके तृप्त होनेसे ही देवता और पितर भी तृप्त होते हैं। ब्राह्मणको समस्त प्राणियोंमें सर्वश्रेष्ठ कहा जाता है॥ १०॥

ब्राह्मणः कुरुते तद्धि यथा यद् यच्च वाञ्छति।
वह्वीस्तु संविशन् योनीर्जायमानः पुनः पुनः॥ ११॥
पर्याये तात कस्मिंश्चिद् ब्राह्मण्यमिह विन्दति।
ब्राह्मण जो-जो जिस प्रकार करना चाहता है, अपने तपके प्रभावसे वैसा ही कर सकता है। तात! जीव इस जगत्के भीतर अनेक योनियोंमें भ्रमण करता हुआ बारंबार जन्म लेता है। इसी तरह जन्म लेते-लेते कभी किसी समयमें वह ब्राह्मणत्वको प्राप्त कर लेता है॥ ११ ½॥

तदुत्सृज्येह दुष्प्रापं ब्राह्मण्यमकृतात्मभिः॥ १२॥
अन्यं वरं वृणीष्व त्वं दुर्लभोऽयं हि ते वरः।

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 382, कुल 2566 में से · SarvaKosh