सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 2337, कुल 2566 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2337

नरेश्वर! व्यासजीकी कृपासे तुम भी इसी तपोवनमें आ पहुँचे हो। अब यहाँ तपस्या करके दुर्लभ सिद्धिका आश्रय ले श्रेष्ठ गति प्राप्त कर लोगे ॥ १५ ॥
त्वं चापि राजशार्दूल तपसोऽन्ते श्रिया वृतः ।
गान्धारीसहितो गन्ता गतिं तेषां महात्मनाम् ॥ १६ ॥
नृपश्रेष्ठ! तुम भी तपस्याके अन्तमें तेजसे सम्पन्न हो गान्धारीके साथ उन्हीं महात्माओंकी गति प्राप्त करोगे ॥ १६ ॥
पाण्डुः स्मरति ते नित्यं बलहन्तुः समीपगः ।
त्वां सदैव महाराज श्रेयसा स च योक्ष्यति ॥ १७ ॥
महाराज! तुम्हारे छोटे भाई पाण्डु इन्द्रके पास ही रहते हैं। वे सदा तुम्हें याद करते रहते हैं। निश्चय ही वे तुम्हें कल्याणके भागी बनायेंगे ॥ १७ ॥
तव शुश्रूषया चैव गान्धार्याश्च यशस्विनी ।
भर्तुः सलोकतामेषा गमिष्यति वधूस्तव ॥ १८ ॥
युधिष्ठिरस्य जननी स हि धर्मः सनातनः ।
तुम्हारी और गान्धारीदेवीकी सेवा करनेसे यह तुम्हारी यशस्विनी बहू युधिष्ठिरजननी कुन्ती अपने पतिके लोकमें पहुँच जायगी। युधिष्ठिर साक्षात् सनातन धर्मस्वरूप हैं (अतः उनकी माता कुन्तीकी सद्गतिमें कोई संदेह ही नहीं है) ॥ १८ १/२ ॥
वयमेतत् प्रपश्यामो नृपते दिव्यचक्षुषा ॥ १९ ॥
प्रवेक्ष्यति महात्मानं विदुरश्च युधिष्ठिरम् ।
संजयस्तदनुध्यानादितः स्वर्गमवाप्स्यति ॥ २० ॥
नरेश्वर! यह सब हम अपनी दिव्य दृष्टिसे देख रहे हैं। विदुर महात्मा युधिष्ठिरके शरीरमें प्रवेश करेंगे और संजय उन्हींका चिन्तन करनेके कारण यहाँसे सीधे स्वर्गको जायँगे ॥ १९-२० ॥

वैशम्पायन उवाच

एतच्छ्रुत्वा कौरवेन्द्रो महात्मा
सार्धं पत्न्या प्रीतिमान् सम्बभूव ।
विद्वान् वाक्यं नारदस्य प्रशस्य
चक्रे पूजां चातुलां नारदाय ॥ २१ ॥
**वैशम्पायनजी कहते हैं—**जनमेजय! यह सुनकर महात्मा कौरवराज धृतराष्ट्र अपनी पत्नीके साथ बहुत प्रसन्न हुए। उन विद्वान् नरेशने नारदजीके वचनोंकी प्रशंसा करके उनकी अनुपम पूजा की ॥ २१ ॥
ततः सर्वे नारदं विप्रसंघाः
सम्पूजयामासुरतीव राजन् ।

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 2337, कुल 2566 में से · SarvaKosh