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सर्वकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 2202, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 2202

यशकी अभिवृद्धि होती है ।।
शरदृतौ तु वैश्यस्य ह्याधानीयो हुताशनः ।
शरद्रात्रं स्वयं वैश्यो वैश्ययोनिः स उच्यते ।।
शरत्कालकी रात्रि साक्षात् वैश्यका स्वरूप है, इसलिये वैश्यको शरद्-ऋतुमें अग्निका आधान करना चाहिये; उस समयकी स्थापित की हुई अग्निको वैश्य योनि कहते हैं ।।
शरद्याधानमेवं वै क्रियते येन पाण्डव ।
तस्यापि श्रीः प्रजायुश्च पशवोऽर्थश्च वर्धते ।।
पाण्डुनन्दन! जो वैश्य शरद्-ऋतुमें अग्निकी स्थापना करता है, उसकी सम्पत्ति, प्रजा, आयु, पशु और धनकी वृद्धि होती है ।।
रसाः स्नेहास्तथा गन्धा रत्नानि मणयस्तथा ।
काञ्चनानि च लौहानि ह्यग्निहोत्रकृतेऽभवन् ।।
सब प्रकारके रस, घी आदि स्निग्ध पदार्थ, सुगन्धित द्रव्य, रत्न, मणि, सुवर्ण और लोहा—इन सबकी उत्पत्ति अग्निहोत्रके लिये ही है ।।
आयुर्वेदो धनुर्वेदो मीमांसा न्यायविस्तरः ।
धर्मशास्त्रं च तत्सर्वमग्निहोत्रकृते कृतम् ।।
अग्निहोत्रको ही जाननेके लिये आयुर्वेद, धनुर्वेद, मीमांसा, विस्तृत न्याय-शास्त्र और धर्मशास्त्रका निर्माण किया गया है ।।
छन्दः शिक्षा च कल्पश्च तथा व्याकरणानि च ।
शास्त्रं ज्योतिर्निरुक्तं चाप्यग्निहोत्रकृते कृतम् ।।
छन्द, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, ज्यौतिषशास्त्र और निरुक्त भी अग्निहोत्रके लिये ही रचे गये हैं ।।
इतिहासपुराणं च गाथाश्चोपनिषत् तथा ।
आथर्वणानि कर्माणि चाग्निहोत्रकृते कृतम् ।।
इतिहास, पुराण, गाथा, उपनिषद् और अथर्ववेदके कर्म भी अग्निहोत्रके लिये ही हैं ।।
तिथिनक्षत्रयोगानां मुहूर्तकरणात्मकम् ।
कालस्य वेदनार्थं तु ज्योतिर्ज्ञानं पुरानघ ।।
निष्पाप! तिथि, नक्षत्र, योग, मुहूर्त और करणरूप कालका ज्ञान प्राप्त करनेके लिये पूर्वकालमें ज्योतिष-शास्त्रका निर्माण हुआ है ।।
ऋग्यजुःसाममन्त्राणां श्लोकतत्त्वार्थचिन्तनात् ।
प्रत्यापत्तिविकल्पानां छन्दोज्ञानं प्रकल्पितम् ।।
ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेदके मन्त्रोंके छन्दका ज्ञान प्राप्त करनेके लिये तथा संशय और विकल्पके निराकरणपूर्वक उनका तात्त्विक अर्थ समझनेके लिये छन्दःशास्त्रकी रचना की गयी है ।।