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सर्वकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1725, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1725

आघ्राय सुबहून् गन्धांस्तानेव प्रतिगृद्ध्यति ।
तस्माद् घ्राणं प्रति शरान् प्रतिमोक्ष्याम्यहं शितान् ॥ ९ ॥
**अलर्कने कहा—**मेरी यह नासिका अनेक प्रकारकी सुगन्धियोंका अनुभव करके भी फिर उन्हींकी इच्छा करती है, इसलिये इन तीखे बाणोंको मैं इस नासिकापर ही छोडूँगा ॥ ९ ॥

घ्राण उवाच

नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन ।
तवैव मर्म भेत्स्यन्ति भिन्नमर्मा मरिष्यसि ॥ १० ॥
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि ।
**नासिका बोली—**अलर्क! ये बाण मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। इनसे तो तुम्हारे ही मर्म विदीर्ण होंगे और मर्मस्थानोंका भेदन हो जानेपर तुम्हीं मरोगे; अतः तुम दूसरे प्रकारके बाणोंका अनुसंधान करो, जिससे तुम मुझे मार सकोगे ॥ १० १/२ ॥
तच्छ्रुत्वा स विचिन्त्याथ ततो वचनमब्रवीत् ॥ ११ ॥
नासिकाका यह कथन सुनकर अलर्क कुछ देर विचार करनेके पश्चात् (जिह्वाको लक्ष्य करके) कहने लगे ॥ ११ ॥

अलर्क उवाच

इयं स्वादून् रसान् भुक्त्वा तानेव प्रतिगृद्ध्यति ।
तस्माज्जिह्वां प्रति शरान् प्रतिमोक्ष्याम्यहं शितान् ॥ १२ ॥
**अलर्कने कहा—**यह रसना स्वादिष्ट रसोंका उपभोग करके फिर उन्हें ही पाना चाहती है। इसलिये अब इसीके ऊपर अपने तीखे सायकोंका प्रहार करूँगा ॥ १२ ॥

जिह्वोवाच

नेमे बाणास्तरिष्यन्ति मामलर्क कथंचन ।
तवैव मर्म भेत्स्यन्ति भिन्नमर्मा मरिष्यसि ॥ १३ ॥
अन्यान् बाणान् समीक्षस्व यैस्त्वं मां सूदयिष्यसि ।
**जिह्वा बोली—**अलर्क! ये बाण मुझे किसी प्रकार नहीं छेद सकते। ये तो तुम्हारे ही मर्मस्थानोंको बींधेंगे। मर्मस्थानोंके बिंध जानेपर तुम्हीं मरोगे। अतः दूसरे प्रकारके बाणोंका प्रबन्ध सोचो, जिनकी सहायतासे तुम मुझे मार सकोगे ॥ १३ १/२ ॥
तच्छ्रुत्वा स विचिन्त्याथ ततो वचनमब्रवीत् ॥ १४ ॥
यह सुनकर अलर्क कुछ देरतक सोचते-विचारते रहे, फिर (त्वचापर कुपित होकर) बोले ॥ १४ ॥

अलर्क उवाच