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सर्वकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1337, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1337

जो मनुष्य इस जगत्में नदियोंपर जल ले जानेवाले पुरुषोंकी सुविधाके लिये पुल निर्माण कराता है, वह मृत्युके पश्चात् उसका पुण्यफल पाता है और सब प्रकारके संकटोंसे छुटकारा पा जाता है ।।
मार्गकृत् सततं मर्त्यो भवेत् संतानवान् पुनः ।
कायदोषविमुक्तस्तु तीर्थकृत् सततं भवेत् ।।
जो मनुष्य सदा मार्गका निर्माण करता है, वह संतानवान् होता है। तथा जो जलमें उतरनेके लिये सीढ़ी एवं पक्के घाट बनवाता है, वह शारीरिक दोषसे मुक्त हो जाता है ।।
औषधानां प्रदानात् तु सततं कृपयान्वितः ।
भवेद् व्याधिविहीनश्च दीर्घायुश्च विशेषतः ।।
जो सदा कृपापूर्वक रोगियोंको औषध प्रदान करता है, वह रोगहीन और विशेषतः दीर्घायु होता है ।।
अनाथान् पोषयेद् यस्तु कृपणान्धकपङ्गुकान् ।
स तु पुण्यफलं प्रेत्य लभते कृच्छ्रमोक्षणम् ।।
जो अनाथों, दीन-दुःखियों, अन्धों और पंगु मनुष्योंका पोषण करता है, वह मृत्युके पश्चात् उसका पुण्यफल पाता और संकटसे मुक्त हो जाता है ।।
वेदगोष्ठाः सभाः शाला भिक्षूणां च प्रतिश्रयम् ।
यः कुर्याल्लभते नित्यं नरः प्रेत्य शुभं फलम् ।।
जो मनुष्य वेदविद्यालय, सभाभवन, धर्मशाला तथा भिक्षुओंके लिये आश्रम बनाता है, वह मृत्युके पश्चात् शुभ फल पाता है ।।
विविधं विविधाकारं भक्ष्यभोज्यगुणान्वितम् ।
रम्यं सदैव गोवाटं यः कुर्याल्लभते नरः ।
प्रेत्यभावे शुभां जातिं व्याधिमोक्षं तथैव च ।
एवं नानाविधं द्रव्यं दानकर्ता लभेत् फलम् ।।
जो मानव उत्तम भक्ष्य-भोज्यसम्बन्धी गुणोंसे युक्त तथा नाना प्रकारकी आकृतिवाली भाँति-भाँतिकी रमणीय गोशालाओंका सदैव निर्माण करता है, वह मृत्युके पश्चात् उत्तम जन्म पाता और रोगमुक्त होता है। इस प्रकार भाँति-भाँतिके द्रव्योंका दान करनेवाला मनुष्य पुण्यफलका भागी होता है ।।
बुद्धिमायुष्यमारोग्यं बलं भाग्यं तथाऽऽगमम् ।
रूपेण सप्तधा भूत्वा मानुष्यं फलति ध्रुवम् ।।
बुद्धि, आयुष्य, आरोग्य, बल, भाग्य, आगम तथा रूप—इन सात भागोंमें प्रकट होकर मनुष्यका पुण्यकर्म अवश्य अपना फल देता है ।।

उमोवाच