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सर्वकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1102, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1102

कोटिमें आते हैं। ये सभी मानव हमारी दृष्टिमें भक्षण और वधके योग्य हैं। इसमें संशय नहीं है॥ ४—६॥
एवंशीलसमाचारान् धर्षयामो हि मानवान्।
श्रूयतां च प्रतीघातान् यैर्न शक्नुम हिंसितुम् ॥ ७॥
जिनके ऐसे शील और आचार हैं, उन मनुष्योंको हम धर दबाते हैं। अब उन प्रतिरोधक उपायोंको सुनिये, जिनके कारण हम मनुष्योंकी हिंसा नहीं कर पाते॥ ७॥
गोरोचनासमालम्भो वचाहस्तश्च यो भवेत्।
घृताक्षतं च यो दद्यान्मस्तके तत्परायणः ॥ ८॥
ये च मांसं न खादन्ति तान् न शक्नुम हिंसितुम्।
जो अपने शरीरमें गोरोचन लगाता, हाथमें वच नामक औषध लिये रहता, ललाटमें घी और अक्षत धारण करता तथा मांस नहीं खाता—ऐसे मनुष्योंकी हिंसा हम नहीं कर सकते॥ ८ ½ ॥
यस्य चाग्निर्गृहे नित्यं दिवारात्रौ च दीप्यते ॥ ९॥
तरक्षोश्चर्म दंष्ट्राश्च तथैव गिरिकच्छपः।
आज्यधूमो बिडालश्चागः कृष्णोऽथ पिङ्गलः ॥ १०॥
येषामेतानि तिष्ठन्ति गृहेषु गृहमेधिनाम्।
तान्यधृष्याण्यगाराणि पिशिताशैः सुदारुणैः ॥ ११॥
जिसके घरमें अग्निहोत्रकी अग्नि नित्य—दिन-रात देदीप्यमान रहती है, छोटे जातिके बाघ (जरख) का चर्म, उसीकी दाढ़ें तथा पहाड़ी कछुआ मौजूद रहता है, घीकी आहुतिसे सुगन्धित धूम निकलता रहता है, बिलाव तथा काला या पीला बकरा रहता है, जिन गृहस्थोंके घरोंमें ये सभी वस्तुएँ स्थित होती हैं, उन घरोंपर भयंकर मांसभक्षी निशाचर आक्रमण नहीं करते हैं॥ ९—११॥
लोकानस्मद्विधा ये च विचरन्ति यथासुखम्।
तस्मादेतानि गेहेषु रक्षोघ्नानि विशाम्पते।
एतद् वः कथितं सर्वं यत्र वः संशयो महान् ॥ १२॥
हमारे-जैसे जो भी निशाचर अपनी मौजसे सम्पूर्ण लोकोंमें विचरते हैं, वे उपर्युक्त घरोंको कोई हानि नहीं पहुँचा सकते; अतः प्रजानाथ! अपने घरोंमें इन रक्षोघ्न वस्तुओंको अवश्य रखना चाहिये। यह सब विषय, जिसमें आपलोगोंको महान् संदेह था, मैंने कह सुनाया॥

इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि प्रमथरहस्ये
एकत्रिंशदधिकशततमोऽध्यायः ॥ १३१ ॥