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सर्वकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 983, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 983

अलम्बुषस्योत्तमवेगवद्भि-
रश्वांश्चतुर्भिर्निजघान बाणैः ।। १७ ।।
इस प्रकार अलम्बुषके द्वारा घायल होकर चक्रधारी विष्णुके समान प्रभावशाली और वेगवान् वीर शिनिपौत्र सात्यकिने अपने उत्तम वेगवाले चार बाणोंद्वारा राजा अलम्बुषके चारों घोड़ोंको मार डाला ।। १७ ।।

अथास्य सूतस्य शिरो निकृत्य
भल्लेन कालानलसंनिभेन ।
सकुण्डलं पूर्णशशिप्रकाशं
भ्राजिष्णु वक्त्रं निचकर्त देहात् ।। १८ ।।
तत्पश्चात् उनके सारथिका भी मस्तक काटकर कालाग्निके समान तेजस्वी भल्लद्वारा पूर्ण चन्द्रमाके समान कान्तिसे प्रकाशित होनेवाले उनके कुण्डलमण्डित मुखमण्डलको भी धड़से काट गिराया ।। १८ ।।

निहत्य तं पार्थिवपुत्रपौत्रं
संख्ये यदूनामृषभः प्रमाथी ।
ततोऽन्वयादर्जुनमेव वीरः
सैन्यानि राजंस्तव संनिवार्य ।। १९ ।।
राजन्! शत्रुओंको मथ डालनेवाले यदुकुलतिलक वीर सात्यकिने इस प्रकार युद्धस्थलमें राजाके पुत्र और पौत्र अलम्बुषको मारकर आपकी सेनाको स्तब्ध करके फिर अर्जुनका ही अनुसरण किया ।। १९ ।।