सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 2652, कुल 3237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2652

ततः प्रायात् त्वरन् पार्थो दीर्घकालं सुसंवृतम् ॥ ४२ ॥
मुञ्चन् क्रोधविषं तीक्ष्णं प्रस्थलाधिपतिं प्रति ।
तत्पश्चात् पार्थ अपने दीर्घकालसे संचित किये हुए तीखे क्रोधरूपी विषको प्रस्थलेश्वर सुशर्मापर छोड़नेके लिये तीव्र गतिसे आगे बढ़े ॥ ४२ ½ ॥
तमर्जुनः पृषत्कानां शतेन भरतर्षभ ॥ ४३ ॥
पूरयित्वा ततो बाहान् प्राहरत् तस्य धन्विनः ।
भरतश्रेष्ठ! अर्जुनने सौ बाणोंद्वारा उसे आच्छादित करके उस धनुर्धर वीरके घोड़ोंपर घातक प्रहार किया ॥
ततः शरं समादाय यमदण्डोपमं तदा ॥ ४४ ॥
सुशर्माणं समुद्दिश्य चिक्षेपाशु हसन्निव ।
इसके बाद यमदण्डके समान भयंकर बाण हाथमें लेकर सुशर्माको लक्ष्य करके हँसते हुए-से शीघ्र ही छोड़ दिया ॥
स शरः प्रेषितस्तेन क्रोधदीप्तेन धन्विना ॥ ४५ ॥
सुशर्माणं समासाद्य बिभेद हृदयं रणे ।
क्रोधसे तमतमाये हुए धनुर्धर अर्जुनके द्वारा चलाये गये उस बाणने सुशर्मापर चोट करके उसकी छाती छेद डाली ॥
स गतासुर्महाराज पपात धरणीतले ॥ ४६ ॥
नन्दयन् पाण्डवान् सर्वान् व्यथयंश्चापि तावकान् ।
महाराज! सुशर्मा आपके पुत्रोंको व्यथित और समस्त पाण्डवोंको आनन्दित करता हुआ प्राणशून्य होकर पृथ्वीपर गिर पड़ा ॥ ४६ ½ ॥
सुशर्माणं रणे हत्वा पुत्रानस्य महारथान् ॥ ४७ ॥
सप्त चाष्टौ च त्रिंशच्च सायकैरनयत् क्षयम् ।
रणभूमिमें सुशर्माका वध करके अर्जुनने अपने बाणोंद्वारा उसके पैंतालीस महारथी पुत्रोंको भी यमलोक पहुँचा दिया ॥ ४७ ½ ॥
ततोऽस्य निशितैर्बाणैः सर्वान् हत्वा पदानुगान् ॥ ४८ ॥
अभ्यगाद् भारतीं सेनां हतशेषां महारथः ।
तदनन्तर पैने बाणोंद्वारा उसके सारे सेवकोंका संहार करके महारथी अर्जुनने मरनेसे बची हुई कौरवी सेनापर आक्रमण किया ॥ ४८ ½ ॥
भीमस्तु समरे क्रुद्धः पुत्रं तव जनाधिप ॥ ४९ ॥
सुदर्शनमदृश्यं तं शरैश्चक्रे हसन्निव ।
ततोऽस्य प्रहसन् क्रुद्धः शिरः कायादपाहरत् ॥ ५० ॥
क्षुरप्रेण सुतीक्ष्णेन स हतः प्रापतद् भुवि ।