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सर्वकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 2066, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 2066

‘इस रथसेनाका संहार करके विश्वविख्यात महाधनुर्धर बलवान् सूतपुत्र कर्णके सामने स्वयं ही अपने-आपको प्रकट करो ॥ ५४ १/२ ॥
उत्तमं जवमास्थाय प्रत्येहि भरतर्षभ ॥ ५५ ॥
असौ कर्णः सुसंरब्धः पञ्चालानभिधावति ।
केतुमस्य हि पश्यामि धृष्टद्युम्नरथं प्रति ॥ ५६ ॥
‘भरतभूषण! तुम उत्तम वेगका आश्रय लेकर शत्रुदलपर आक्रमण करो। वह क्रोधमें भरा हुआ कर्ण पांचालोंपर धावा बोल रहा है। मैं उसकी ध्वजाको धृष्टद्युम्नके रथके पास देख रहा हूँ ॥ ५५-५६ ॥
समुपैष्यति पञ्चालानिति मन्ये परंतप ।
आचक्षे च प्रियं पार्थ तवेदं भरतर्षभ ॥ ५७ ॥
राजासौ कुशली श्रीमान् धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः ।
असौ भीमो महाबाहुः संनिवृत्तश्चमूमुखे ॥ ५८ ॥
‘परंतप! मैं समझता हूँ, कर्ण पांचालोंपर अवश्य ही आक्रमण करेगा। भरतश्रेष्ठ पार्थ! मैं तुमसे एक प्रिय समाचार कह रहा हूँ—धर्मपुत्र श्रीमान् राजा युधिष्ठिर सकुशल हैं; क्योंकि वे महाबाहु भीमसेन सेनाके मुहानेपर लौट रहे हैं ॥ ५७-५८ ॥
वृतः सृञ्जयसैन्येन शैनेयेन च भारत ।
वध्यन्त एते समरे कौरवा निशितैः शरैः ॥ ५९ ॥
भीमसेनेन कौन्तेय पञ्चालैश्च महात्मभिः ।
‘भारत! उनके साथ सृञ्जयोंकी सेना और सात्यकि भी हैं। कुन्तीकुमार! भीमसेन तथा महामनस्वी पांचाल वीर समरांगणमें अपने तीखे बाणोंद्वारा इन कौरवोंका वध कर रहे हैं ॥ ५९ १/२ ॥
सेना हि धार्तराष्ट्रस्य विमुखा विक्षरद्व्रणा ॥ ६० ॥
विप्रधावति वेगेन भीमस्याभिहता शरैः ।
‘भीमके बाणोंसे घायल हो दुर्योधनकी सेना युद्धसे मुँह फेरकर बड़े वेगसे भाग रही है। उसके घावोंसे रक्तकी धारा बह रही है ॥ ६० १/२ ॥
विपन्नसस्येव मही रुधिरेण समुक्षिता ॥ ६१ ॥
भारती भरतश्रेष्ठ सेना कृपणदर्शना ।
‘भरतश्रेष्ठ! खूनसे लथपथ हुई कौरव-सेना, जहाँकी खेती नष्ट हो गयी है उस भूमिके समान अत्यन्त दयनीय दिखायी देती है ॥ ६१ १/२ ॥
निवृत्तं पश्य कौन्तेय भीमसेनं युधां पतिम् ॥ ६२ ॥
आशीविषमिव क्रुद्धं द्रावयन्तं वरूथिनीम् ।