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महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 204, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 204

रंगवाले घोड़े रणभूमिमें ले गये ॥ ६३ ॥
चित्रायुधं चित्रमाल्यं चित्रवर्मायुधध्वजम् ।
ऊहुः किंशुकपुष्पाणां समवर्णा हयोत्तमाः ॥ ६४ ॥
जिनके माला, कवच, अस्त्र-शस्त्र और ध्वज सब कुछ विचित्र हैं, उन राजा चित्रायुधको* पलाशके फूलोंके समान लाल रंगवाले उत्तम घोड़े संग्राममें ले गये ॥ ६४ ॥
एकवर्णेन सर्वेण ध्वजेन कवचेन च ।
धनुषा रथवाहैश्च नीलैर्नीलोऽभ्यवर्तत ॥ ६५ ॥
जिनके ध्वज, कवच और धनुष सब एक रंगके थे, वे राजा नील अपने रथमें जुते हुए नील रंगके घोड़ोंद्वारा रणक्षेत्रमें उपस्थित हुए ॥ ६५ ॥
नानारूपै रत्नचिह्नैर्वरूथैरथकार्मुकैः ।
वाजिध्वजपताकाभिश्चित्रैश्चित्रोऽभ्यवर्तत ॥ ६६ ॥
जिनके रथका आवरण, रथ तथा धनुष नाना प्रकारके रत्नोंसे जटिल एवं अनेक रूपवाले थे, जिनके घोड़े, ध्वजा और पताकाएँ भी विचित्र प्रकारकी थीं, वे राजा चित्र चितकबरे घोड़ोंद्वारा युद्धके मैदानमें आये ॥
ये तु पुष्करपर्णस्य तुल्यवर्णा हयोत्तमाः ।
ते रोचमानस्य सुतं हेमवर्णमुदावहन् ॥ ६७ ॥
जिनके रंग कमलपत्रके समान थे, वे उत्तम घोड़े रोचमानके पुत्र हेमवर्णको रणभूमिमें ले गये ॥ ६७ ॥
योधाश्च भद्रकाराश्च शरदण्डानुदण्डयः ।
श्वेताण्डाः कुक्कुटाण्डाभा दण्डकेतुं हयाऽवहन् ॥ ६८ ॥
युद्ध करनेमें समर्थ, कल्याणमय कार्य करनेवाले, सरकण्डेके समान श्वेत-गौर पीठवाले, श्वेत अण्डकोशधारी तथा मुर्गीके अण्डेके समान सफेद घोड़े दण्डकेतुको युद्धस्थलमें ले गये ॥ ६८ ॥
केशवेन हते संख्ये पितर्यथ नराधिपे ।
भिन्ने कपाटे पाण्ड्यानां विद्रुतेषु च बन्धुषु ॥ ६९ ॥
भीष्मादवाप्य बास्त्राणि द्रोणाद् रामात् कृपात् तथा ।
अस्त्रैः समत्वं सम्प्राप्य रुक्मिकर्णार्जुनाच्युतैः ॥ ७० ॥
इयेष द्वारकां हन्तुं कृत्स्नां जेतुं च मेदिनीम् ।
निवारितस्ततः प्राज्ञैः सुहृद्भिर्हितकाम्यया ॥ ७१ ॥
वैरानुबन्धमुत्सृज्य स्वराज्यमनुशास्ति यः ।
स सागरध्वजः पाण्ड्यश्चन्द्रश्वरश्मिनिभैर्हयैः ॥ ७२ ॥
वैडूर्यजालसंछन्नैर्वीर्यद्रविणमाश्रितः ।

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