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सर्वकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 1447, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 1447

नोकसे शत्रुके शरीरका स्पर्श करना ‘प्रसृत’ कहा गया है। चकमा देकर शत्रुपर शस्त्रका आघात करना ‘सृत’ बताया गया है। शत्रुके दायें-बायें तलवार चलाना ‘परिवृत्त’ कहा गया है। पीछे हटना ‘निवृत्त’ है। दोनों योद्धाओंका परस्पर आघात-प्रत्याघात ‘सम्पात’ कहलाता है। अपनी विशेषता स्थापित करना ‘समुदीर्ण’ है। अंग-प्रत्यंगमें तलवार भाँजना ‘भारत’ माना गया है। विचित्र रीतिसे तलवार चलानेकी कला दिखाना ‘कौशिक’ कहा गया है। अपनेको ढालकी आड़में छिपाकर तलवार चलानेका नाम ‘सात्वत’ है।